बताते हैं कि अपने परिवार की जरूरतों को छोड़कर पहले पार्टी के कार्यों को पूरा करने के चक्कर में उन्हें पिता से मार भी खानी पड़ती थी, लेकिन एक स्वयंसेवक होने के नाते फिर सबकुछ भूल कर अपने मिशन में जुट जाते थे। संजय बताते हैं कि प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से लेने के बाद वह आरएसएस से जुड़ गए और राजनीति में भी हर कदम पर संघ की सीख उनके काम आई।
भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने बीते दिनों को याद करते हुए बताया कि संगठन में कार्य करते वक्त कभी-कभी प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता था। उस समय संगठन का कार्य कर वापस लौटने पर इतनी भी धनराशि जेब में नहीं होती थी कि वाहन का किराया देकर वापस घर लौट सकूं।