प्रदेश के कद्दावर नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले अंबिका चौधरी ने पहली बार वर्ष 1991 में जनता दल के टिकट पर कोपाचीट विधानसभा सीट से भाग्य आजमाया था, लेकिन चुनाव हार गए। वर्ष 1993 में पहली बार सपा से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 1996, 2002 तथा 2007 में लगातार चार बार विधायक बने। वर्ष 2002 में बनी सपा की सरकार में मंत्री भी रहे।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अंबिका चौधरी हार गए। हालांकि प्रदेश में सपा सरकार बनी तो बार फिर वह मंत्री बने। कुछ माह बाद एमएलसी भी चुने गए। सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा से टिकट नहीं मिलने के कारण वह दशकों पुरानी पार्टी को छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे।
अंबिका के साथ पूर्व मंत्री नारद राय भी बसपा में गए थे, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने भी बसपा छ़ोड़ दी थी। अब अंबिका चौधरी ने भी बसपा से नाता तोड़ लिया है। अंबिका चौधरी की होने वाली घर वापसी को सपाई बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। राजनीतिक दिग्गज इसे विधानसभा 2022 की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं।