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सियासत: अंबिका चौधरी को साध सपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी को दी धार, अभी कई और बागियों पर नजर

Thu, 24 Jun 2021 04:52 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, बलिया

सार

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बलिया के फेफना विधानसभा से टिकट कटने से नाराज पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने सपा से इस्तीफा दे दिया था और बसपा में शामिल हो गए थे। हाल में उन्होंने बसपा से भी इस्तीफा दे दिया। 
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अंबिका चौधरी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बलिया में आनंद चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बना और उनके पिता पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी के भी सपा में शामिल कराने का संकेत देकर सपा ने ये साबित कर दिया है कि उसने जनपद में पार्टी के खोए जनाधार को वापस पाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। निश्चित तौर पर अंबिका चौधरी की वापसी से बलिया में सपा को काफी बल मिलेगा। सपा सूत्रों की मानें तो एक-दो दिन में अंबिका चौधरी भी सपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इधऱ, चर्चा है कि सपा की नजर बागी नेताओं पर भी है। जिले के कई और नेता-कार्यकर्ता जल्द ही सपा में आधिकारिक रूप से शामिल होंगे।

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 वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बलिया के फेफना विधानसभा से टिकट कटने से नाराज पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने सपा से इस्तीफा दे दिया था और बसपा में शामिल हो गए थे। मायावती ने उन्हें फेफना विधानसभा सीट से प्रत्याशी भी बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन से बलिया सीट से सनातन पांडेय चुनाव लड़े।

इसमें अंबिका चौधरी ने सपा प्रत्याशी का साथ दिया था। अंबिका चौधरी करीब दो दशक तक बलिया के कोपाचीट (वर्तमान में फेफना) विधानसभा क्षेत्र की अगुवाई कर चुके हैं। उनके बसपा से इस्तीफे के बाद जिले की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

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अंबिका चौधरी का सियासी सफर

प्रदेश के कद्दावर नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले अंबिका चौधरी ने पहली बार वर्ष 1991 में जनता दल के टिकट पर कोपाचीट विधानसभा सीट से भाग्य आजमाया था, लेकिन चुनाव हार गए। वर्ष 1993 में पहली बार सपा से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 1996, 2002 तथा 2007 में लगातार चार बार विधायक बने। वर्ष 2002 में बनी सपा की सरकार में मंत्री भी रहे।

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अंबिका चौधरी हार गए। हालांकि प्रदेश में सपा सरकार बनी तो बार फिर वह मंत्री बने। कुछ माह बाद एमएलसी भी चुने गए। सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा से टिकट नहीं मिलने के कारण वह दशकों पुरानी पार्टी को छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे।

अंबिका के साथ पूर्व मंत्री नारद राय भी बसपा में गए थे, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने भी बसपा छ़ोड़ दी थी। अब अंबिका चौधरी ने भी बसपा से नाता तोड़ लिया है। अंबिका चौधरी की होने वाली घर वापसी को सपाई बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। राजनीतिक दिग्गज इसे विधानसभा 2022 की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं।     
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