बैरिया। धनुष्य यज्ञ मेले के मद्देनजर अगहन सुदी पंचमी की पूर्व संध्या पर बड़ी संख्या में साधु-संत शनिवार को संत सुदिष्ट बाबा की समाधि स्थल स्थित आश्रम में पहुंच गए। वहीं, बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी कल्पवास के लिए आश्रम पर पहुंच कर भजन-कीर्तन कर रहे हैं।
साधु-संत व श्रद्धालुओं के अनुसार कल्पवास वेदकालीन अरण्य संस्कृति की देन है, कल्पवास का नियम हमारे यहां हजारों वर्षों से चला आ रहा है। जंगल में ऋषि-मुनि ध्यान और तप करते थे उस समय ऋषियों ने गृहस्थों के लिए कल्पवास का विधान रखा था। उनके अनुसार इस दौरान गृहस्थों को थोड़े समय के लिए शिक्षा और दीक्षा दी जाती थी। कल्पवास के नियम के मुताबिक, इस दौरान जो भी गृहस्थ कल्पवास का संकल्प लेकर आता है वह पत्तों और घासफूस से बनी हुई कुटिया में रहता है जिसे पर्ण कुटी कहा जाता है। कल्पवास करने वाले श्रद्धालु इस दौरान दिन में एक बार सात्विक भोजन करते हैं व मानसिक रूप से धैर्य, अहिंसा और भक्तिभाव का पालन किया जाता है। यहां कुटिया में रहने वाले कल्पवासी सुबह की शुरूआत स्नान से करते हैं। देररात तक भजन कीर्तन के बाद भोर में सत्संग किया जाता है। हालांकि देर रात से ही संत सुदिष्ट बाबा की समाधि पर पूजन के बाद श्रद्धालुओं के जयकारे की गूंज सुनाई देने लगती है। कल्पवासी व श्रद्धालु सुबह साधु संतों को दान पूण्य करने के बाद धनुष यज्ञ मेले का आनंद उठाते हैं और जलेबी संग सब्जी का स्वाद लेते हैं।
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संत सुदिष्ट बाबा ने अंग्रेज कलेक्टर को कराया था ताकत का एहसास : बैरिया। अंग्रेजी हुकूमत के समय एक अंग्रेज कलेक्टर बाबा का परीक्षा लेने पहुंचे तो संत सुदिष्ट बाबा ने अंग्रेज कलेक्टर को अपनी ताकत का एहसास कराया था। बाबा के आशीर्वाद से अंग्रेज कलेक्टर को पुत्र की प्राप्ति हुई थी। जिससे अंग्रेज कलेक्टर ने रास्ता व पोखरे का निर्माण कराया था। रविवार को धर्म ध्वज फहराने के साथ ही मेला शुरू होगा। संत सुदिष्ट बाबा का नाम विख्यात होता देख अंग्रेज कलेक्टर को चिढ़ हो गई थी। पहले अपने मातहतों को सुदिष्टबाबा का आश्रम खाली कराने का आदेश दिया। मातहत जब आश्रम खाली नहीं करा सके तब अंग्रेज कलेक्टर ने सुदिष्टबाबा से मिलने उनके आश्रम पहुंच गया। सुदिष्ट बाबा ने अंग्रेज कलेक्टर से पूछा कि क्या खाएंगे, दोपहर का समय था अंग्रेज कलेक्टर ने कहा कि दूध पिला दीजिए। बाबा को मालूम था कि दूध नहीं है, बावजूद उन्होंने अपने शिष्य से कहा कमंडल में दूध रखा है ले आओ। बाबा की बात सुन शिष्य चिंतित हो गया कि बाबा को मालूम है कि कमंडल में दूध नहीं है,बावजूद दूध मांग रहे हैैं। शिष्य को चिंतित होता देख बाबा फिर कहे क्यों चिंतित हो कमंडल में दूध रखा है दूध लाओ। गुरु का आदेश मिलने के बाद शिष्य कमंडल लाने गया तो देखा कमंडल दूध से भरा हुआ है। शिष्य को आश्चर्य हुआ, लेकिन कुछ नहीं बोला और कमंडल से दूध निकाल अंग्रेज कलेक्टर को पिलाया। जाते-जाते अंग्रेज कलेक्टर ने बाबा से पुत्र प्राप्ति का वरदान मांग लिया। पुत्र प्राप्त होने के बाद अंग्रेज कलेक्टर दोबारा बाबा के आश्रम पहुंचकर बाबा के इच्छानुसार सड़क, पोखरा व कुंआ का निर्माण कराया।
12 एकड़ में लगा है धनुष यज्ञ मेला : बैरिया। सुदिष्ट बाबा के आश्रम पर साधु-संतों का जमावड़ा शुरू हो गया है। रविवार को बाबा के दरबार मे साधु-संतों के माथा टेकने के बाद यूपी-विहार के हजारों श्रद्धालु माथा टेकेंगे। साथ ही संत रामबालक बाबा मेले के चौक पर धर्मध्वजरोहण कर धनुषयज्ञ मेला का उद्घाटन करेंगे। खास यह है कि इस बार हजारों की भीड़ का फायदा उठाने वाले चोर-उचक्के व मनचलों की खैर नहीं है, उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। क्योंकि गलत हरकत करने वाले लोग अगर सीसीटीवी कैमरा से बच भी गए तो ड्रोन कैमरे की नजर से नहीं बच सकेंगे। यूपी व बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र की सुप्रसिद्ध सुदिष्ट बाबा का धनुष यज्ञ मेला में सिर्फ द्वाबा के लोग ही नहीं बिहार के लोग भी मेला घूमने व आवश्यक सामग्री खरीदने आते हैं। हमेशा की तरह अगहन सुदी पंचमी रविवार को छपरा की ओर से सुबह सात बजे से 10 बजे तक आने वाली सभी ट्रेनों से हजारों श्रद्धालु व मेला प्रेमियों को आने की संभावना है। सुदिष्ट बाबा को मानने वाले हजारों महिला व पुरुष बाबा के आश्रम पर मत्था टेकने के बाद साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूरा मेला 12 एकड़ की भूमि पर लगाया गया है और आधुनिक नगर के रूप में बसाया गया है। मेले में 12 चौक व 84 गलियां बनाई गई हैं। मेले में इटावा, कानपुर, बहराईच, वाराणसी, जौनपुर, फैजाबाद आदि दूर दराज के विभिन्न दुकानदार अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं।
कोट
रविवार की सुबह नौ बजे धनुषयज्ञ मेले के चौक पर परम्परागत ढंग से संत रामबालक बाबा के द्वारा धर्मध्वज फहराने के बाद मेले का शुभारम्भ हो जाएगा। मेले में मेलार्थियों व श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।-गौरीशंकर प्रसाद, प्रधान प्रतिनिधि कोटवां