प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतसर को खुद इलाज की जरूरत है। इस पीएचसी में बिजली व्यवस्था इतनी लचर है कि यहां मरीजों की जान खतरे में डाल कर टॉर्च के सहारे प्रसव कराया जाता है। जनरेटर का रखरखाव भी सही ढंग से नहीं होता।
पीएचसी का भवन भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसमें तैनात चिकित्सक और कर्मचारी जान जोखिम में डाल कार्य करते हैं। यहां तक कि मरीज दवा स्टोर से सुई-दवा लेने से घबराते हैं। रतसर में पीएचसी की स्थापना करने का उद्देश्य कस्बा समेत आसपास के लोगों को चिकित्सकीय सेवा के लिए जिला मुख्यालय नहीं जाने पड़े थाा
लेकिन स्वास्थ्य महकमा की उदासीनता के चलते भवन जर्जरावस्था में पहुंच गया है। यहां लगे पंखे फंुके पड़े हैं तो फर्नीचर भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस पीएचसी पर रात्रि में प्रसव कराना टेढ़ी-खीर है। बिजली के अभाव में यहां टाॅर्च की रोशनी में ही प्रसव कराया जाता है। सूत्रों की माने तो पीएचसी पर जेनरेटर तो है, लेकिन कभी चलाया नहीं जाता है। इस बाबत केंद्र प्रभारी डाॅ. केशव प्रसाद ने बताया कि समस्याओं से निजात के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता हो चुकी है, शीघ्र ही समस्याओं का निस्तारण कर दिया जाएगा।