थम्हनपुरा होते हुए बैरिया तक जाने वाला रिंग बंधा पर मंगलवार को गंगा का पानी बढने के कारण दबाव बढ़ गया। वहीं विभागीय उदासीनता अभी भी ज्यों की त्यों बनी है, जबकि ये बंधा 2013 की ही बाढ़ में आधा कट गया था। बीच में तीन साल समय मिला, लेकिन किसी भी अधिकारी का ध्यान इस पर नहीं गया। वहीं जनप्रतिनिधि भी इसे मुद्दा बनाना मुनासिब नहीं समझा।
नतीजन इस बार हालत इतनी दयनीय है कि बाकी बचे बंधा पानी के दबाव के कारण कभी भी टूट सकता है और तबाही का मंजर बन सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान स्थल पर केवल झाड़-झंखाड़ डालने के अलावा कोई कार्य नहीं हुआ है। एक हजार सीमेंट की बोरियां बलुई मिट्टी से भरकर रखी जरूर गई है।
लेकिन कटान स्थल पर अभी तक डाला नहीं गया। वहीं विभाग के जेई कृष्ण कुमार मंगलवार को बंधे का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि एक हजार बोरियां बनकर तैयार, उसे कटान स्थल पर डाला जाएगा। इसके अलावा दो हजार और बोरियां डाली जाएंगी। उन्होंने बताया कि बंधे की वस्तुस्थिति से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।