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जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे 100 से ज्यादा मरीज

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बलिया। जिले में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। जिला अस्पताल समेत सभी अस्पतालों में वायरल और अन्य बुखार से पीड़ित मरीजों की भीड़ लगी हुई है। डेंगू के भी अब तक 16 मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने में चिकित्सकों की कमी परेशानी का सबब बनी हुई है। जिला अस्पताल में आए गंभीर मरीजों को स्पेशलिस्ट और संसाधन के अभाव में रेफर करना पड़ रहा है। एक तरफ स्पेशलिस्ट और संसाधन का अभाव है तो दूसरी तरफ मानक से काफी कम चिकित्सक हैं।
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सरकारी चिकित्सकों की कमी के कारण कमोबेश सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। इस समय डेंगू, वायरल बुखार का प्रकोप है। अस्पताल में मरीजों की बाढ़ आई हुई है। प्रतिदिन 100 से 120 मरीज सामने आ रहे हैं। सोनबरसा सीएचसी समेत कई अस्पतालों की हालत ऐसी हो जा रही है कि वो सिर्फ फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में पुराना और नया अस्पताल भवन मिलाकर कुल 326 बेड का है। वर्तमान में लगभग 236 बेड संचालित हो रहे हैं। इसके सापेक्ष रेडियोलाजिस्ट समेत मात्र 24 चिकित्सक तैनात है। इसमें एक चिकित्सक सीएमओ के अधीन हैं, जबकि सात चिकित्सक का पद रिक्त है। पूर्व के 176 बेड के सापेक्ष 30 चिकित्सक का मानक है। 236 संचालित बेड पर 24 चिकित्सक के देखभाल की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों की भारी कमी
जिला अस्पताल में न तो न्यूरो सर्जन हैं और न ही मानसिक रोग चिकित्सक। इसके अलावा, गंभीर उपचार के लिए कोई संसाधन नहीं है। इससे मजबूर होकर गंभीर मरीजों को जिला चिकित्सालय से रेफर करना पड़ता है। जिला चिकित्सालय में भवन पर भवन बनते गए, लेकिन चिकित्सकों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बजाय और कम होती चली गई। अगर 176 बेड पर 30 चिकित्सक के तैनाती का मानक है तो 326 बेड पर दो गुना होना चाहिए। सीमित संसाधन और सीमित चिकित्सक के भरोसे जिला चिकित्सालय संचालित हो रहा है। आलम यह है कि जिला चिकित्सालय में संसाधनों की भी घोर कमी है।
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