वन विभाग के राजस्व की वसूली में अचानक 75 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि आज भी तहसील क्षेत्र में लाल बालू का अवैध धन्धा फल फूल रहा है। बिहार के कोइलवर से सड़क मार्ग व जल मार्ग से द्वाबा में अवैध तरीके से लाल बालू की खेप पहुंच रही है।
विधानसभा चुनाव बाद से ही लालबालू का खेल शुरू हो गया। हालांकि वन विभाग ने अवैध लाल बालू ले जाने वालों से रसीद काट कर उस समय राजस्व को लाभ पहुंचाया। विभागीय आकड़ों पर गौर करें तो फरवरी से सितम्बर तक वन विभाग द्वारा हर दो माह पर 50 लाख से 70 लाख रुपये राजस्व का फायदा पहुंचाया गया था। जबकि पांच अक्टूबर को वन दरोगा से हुई मारपीट की घटना के बाद अक्टूबर व नवम्बर माह में करीब 14 लाख रुपये ही वसूली हो सकी है। सूत्रों की माने तो वनकर्मियों के राजस्व वसूली में रुचि न लेने के वजह से हर माह लगभग 25 से 30 लाख रुपयों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उधर, वन क्षेत्राधिकारी आरके शर्मा ने बताया कि बैरिया में वनकर्मियों का टोटा है। चार फारेस्ट गार्ड का जिम्मा एक ही फारेस्ट गार्ड को दी गयी है। जबकि वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय बिना बाबू के ही चल रहा है। बताया कि मांझी बैरियर पर आठ वनकर्मियों का मानक है। लेकिन दो वनकर्मी ही बैरियर की जिम्मेदारी संभाल रहे है।