दूबे छपरा में रिंग बंधे को बचाने के लिए बोरियों में बालू तथा राबिश भरते मजदूर।
मंजिले उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख होने से कुछ नहीं होता, हौसले से उड़ान होती है। यह कहावत उस समय चरितार्थ हुई। जब जिला प्रशासन व बाढ़ विभाग के हाथ खड़ा करने के बाद उदय छपरा निवासी स्व. शिवशंकर राम का पुत्र रविशंकर राम (30) ने अपने घर के सामानों को सुरक्षित ठौर देने की परवाह किए बिना ही अपने चंद चार साथियों के साथ डेंजर प्वाइंट पर बालू की बोरियों को डालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते रविशंकर के साथ एक कारवां बन गया और इन्होंने दूबे छपरा रिंग बंधे को अब तक टूटने से बचा लिया।
रवि की मानें तो मौके पर पहुंचने वाले हर शख्स केवल यही गुहार लगाता रहा कि बस भाई एक बोरी जिंदगी के लिए और जो भी पहुंचा सबने मिलकर कटने वाली जगह पर एक सेतु बना डाला। रवि ने बताया कि मैं अपने चार साथी शैलेश चौधरी, मुन्ना यादव, प्यारेलाल राम, गुड्डू राम ने पहले बालू की बोरियों को कटान स्थल पर फेंकना शुरू किया।
उसके दो घंटे बाद एसडीएम बैरिया, क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश अंचल सहित अन्य जिले के बड़े अधिकारी मौके पर तो पहुंचा। लेकिन सबने यही कहा कि छोड़कर आप लोग पीछे हट जाइए। बंधा अब कभी भी कट सकता है। लेकिन हम लोगों ने हार नहीं मानी और अंतत: मां गंगा ने भीख के रूप में हम लोगों को वरदान दे दिया।
रात तक एसडीएम बैरिया भी हम लोगों के बाबा भृगु की जयकारा लगाते हुए बालू की बोरियों को डालने के साथ हौसला अफजाई करते रहे। इस तरह एसडीएम बैरिया अरविंद कुमार ने बताया कि रवि को हमने भी पहले कहा था आप हट जाओ। लेकिन उसके हौसले को देख हमने भी लोहा माना। अब बाढ़ खत्म होने के बाद तहसील प्रशासन की तरफ से रवि को पांच हजार रुपये नकद इनाम दिया जाएगा और शासन स्तर पर भी इसके लिए जिलाधिकारी से माध्यम से लिखा जाएगा।