बलिया। इस वर्ष बाढ़ व लगातार बारिश के बाद रबी फसलों की बोआई विलंब से हुई। लेकिन मौसम अनुकूल होने से खासकर आलू के साथ ही दलहनी व अन्य फसलों की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। आलू की पैदावार के सापेक्ष भंडारण की माकूल व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को इस समस्या से जूझना पड़ेगा। इस वर्ष कृषि विभाग की ओर से कुल 1.80 लाख हेक्टेयर में रबी की बोआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जो पिछले वर्ष के सापेक्ष 11 हजार हेेक्टेयर अधिक है।
बताया जाता है कि गंगा किनारे के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अरहर की खेती होती है जो एक फसली होती है। इसकी बोआई खरीफ के दौरान होती है लेकिन कटाई रबी फसलों के साथ होती है। इस वर्ष गंगा में आई बाढ़ के कारण इन खेतों की फसल बर्बाद हो गई। इसके अलावा इस वर्ष मई से लेकर अगस्त महीने तक रुक-रुक कर लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव के कारण भी रबी की बोआई प्रभावित हुई और विलंब से बोआई की गई। ऐसे में इस वर्ष रबी की खेती का दायरा भी बढ़ा। कृषि विभाग के आंकड़े को देखें तो पिछले वर्ष की सापेक्ष 11 हजार हेक्टेयर अधिक रकबे में रबी की बोआई की गई है। हालांकि इसके बाद मौसम ने काफी साथ दिया और दलहनी से लेकर गेहूं आदि की फसलें अच्छी हैं और पैदावार भी अच्छी होने की उम्मीद है। उधर, आलू की बोआई भी कुछ विलंब से हुआ लेकिन यह फसल भी अच्छी है और पैदावार भी ठीक होने की उम्मीद है। इस वर्ष जिले में 8621 हेक्टेयर में आलू की खेती की गई है और कुल 1.20 लाख टन आलू उत्पादन होने की उम्मीद है। जबकि जिले में कुल 15 कोल्ड स्टोरेज हैं। जिसकी भंडारण क्षमता कुल 11 हजार टन की ही है। ऐसे में भंडारण की माकूल व्यवस्था नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ना तय है।
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कृषि विभाग की ओर से निर्धारित आच्छादन हेक्टेयर में
फसल 2020-21 2021-22
गेहूं 137921 138670
जौ 3485 3666
मक्का 2848 3512
तोरिया ------- 2583
सरसों 1104 1228
चना 3180 3095
मसूर 18283 23626
मटर 2844 3640
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इस वर्ष रबी की बोआई विलंब से जरूर हुई लेकिन मौसम अनुकूल होने से फसलें अच्छी हैं। सभी फसलों के पैदावार भी ठीक होने की उम्मीद है। इस वर्ष 11 हजार हेक्टेयर अधिक रकबा में रबी की खेती हुई है।
- विकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी बलिया