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Ballia News: सरयू नदी के तटवर्ती क्षेत्र में कच्चे तेल की संभावना, छह जगहों पर शुरू हुई खोदाई

Sun, 18 May 2025 11:28 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, बलिया

सार

 कच्चे तेल और गैस मिलने की संभावना पर पटना से मऊ तक स्थान चिह्नित किए गए हैं। जानकारी के अनुसार सरयू नदी के निकटवर्ती क्षेत्र में छह जगह पर खोदाई शुरू हो गई है। बताया ये भी जा रहा है कि सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के विभिन्न मौजों में करीब 50 स्थानों को  चिह्नित किया गया है
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कच्चा तेल - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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जिले में कच्चे तेल व गैस मिलने की संभावना है। गंगा परिक्षेत्र में चल रही खोदाई के बाद ओएनजीसी ने सरयू नदी के तटवर्ती इलाकों में भी खोदाई शुरू करा दी है। सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के पंदह, भांटी, चकखान और सिवानकला मौजे में रविवार को करीब छह स्थानों पर खोदाई शुरू की गई।

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यह कार्य तीन से चार दिन तक चलेगा। इस दौरान क्षेत्र के कुछ अन्य चिह्नित स्थानों पर भी खोदाई कर उसकी रिपोर्ट ओएनजीसी को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्य योजना तैयार होगी। इंचार्ज कमल परमार ने बताया कि पटना से मऊ तक ऐसे बहुत से स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां कच्चे तेल और गैस मिलने की संभावना है।

सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र में करीब 50 ऐसे स्थानों को खोदाई के लिए चयनित किया गया है। कुछ स्थानों पर खोदाई शुरू कर दी गई है। शेष स्थानों पर सोमवार को खोदाई शुरू होगी। चिह्नित स्थानों पर करीब 90 से 100 फीट की गहराई में खोदाई करने के बाद उसमें ब्लास्ट किया जाता है।
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सेंसर से प्राप्त संकेतों के आधार पर ही कच्चे तेल या गैस की होने की संभावना का पता चलता है। रिपोर्ट सकारात्मक आने पर उसका विवरण ओएनजीसी को भेजा जाता है। उसके बाद ही आगे को प्रक्रिया होती है। फिलहाल खोदाई का कराया जा रहा है।






 

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सर्वेक्षण के आधार पर शुरू हुआ काम

इंचार्ज कमल परमार ने बताया कि गंगा बेसिन क्षेत्र में सर्वेक्षण के बाद कच्चे तेल और गैस के भंडार होने के संकेत मिले थे। अधिकतर भाग गंगा और सरयू के तटवर्ती इलाकों में हैं। करीब सात वर्ष से चले रहे सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर कुछ स्थानों को चिह्नित कर वहां खोदाई शुरू की गई है। सरयू नदी के परिक्षेत्र में भी ऐसे बहुत से स्थान मिले हैं।

करीब 100 फीट जमीन की बोरिंग कर उस गड्ढे में विस्फोटक से धमाका किया जाएगा। विस्फोट से धरती में उत्पन्न होने वाली तरंग या कंपन से जो ग्राफ तैयार होगा उसी आधार पर यह निर्धारित होगा कि कच्चे तेल की मौजूदगी कहां पर है। तीन साल तक गंगा व सरयू के बीच के क्षेत्रों सर्वेक्षण किया गया था। जिसके संकेत सकारात्मक मिले थे।
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