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राजनीतिक मायने तो निकलने ही थे

Sun, 01 May 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कौशल किशोर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला योजना के लिए बलिया को चुनने के राजनीतिक मायने निकालने वालों को भले आड़े हाथ लिया हो लेकिन लगभग पचास मिनट के भाषण में श्रमिक दिवस पर  उन्होंने कांग्रेस की खूब मजम्मत की। गरीबों की हालत के लिए सीधे कांग्रेस की 50 साल की खराब नीतियों को जिम्मेदार ठहराया लेकिन सपा या बसपा का नाम भी   नहीं लिया। न तो प्रदेश की कानून व्यवस्था का जिक्र किया और न ही ऐसा कोई मुद्दा उठाया, जिन्हें इन दिनों भाजपा जोरशोर से सपा के खिलाफ उठा रही है।
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दरअसल, अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक स्थिति अभी साफ नहीं है। किन-किन दलों में गठबंधन होगा, स्पष्ट न होने दलों का शीर्ष नेतृत्व बच-बचकर बोल रहा है। मोदी भी इसके अपवाद नहीं हैं। चूंकि भाजपा के लिए यह साफ है कि विधानसभा चुनाव में किसी भी सूरत में कांग्रेस के साथ उसका समझौता नहीं होना है। हालांकि फिलवक्त कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में स्थिति भी ऐसी नहीं है कि कोी दल उससे समझौता करने के लिए लालायित हो। बावजूद इसके प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबी और गरीबों की हालत के लिए जिस प्रकार कांग्रेस पर हमला किया और बाकी दलों पर खामोश रहे, वह आने वाले समय की राजनीति का संकेत दे रहा है।

इसके अलावा दो मई को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बलिया के दौरे पर आ रहे हैं। स्वाभाविक था कि मोदी अगर आज सपा पर कुछ बोलते तो कल उसका जवाब मिलता। वैसे भी पूर्वांचल के पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो विधानसभा चुनाव के लिहाज से भाजपा यहां कमजोर है। समाजवादी पार्टी पहले तो बहुजन समाज पार्टी दूसरे स्थान पर है।
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अगर प्रदेश में सरकारों के गठन पर नजर डालें तो अलग-अलग समय में भाजपा सपा और बसपा दोनों के साथ गठबंधन कर सरकार बना चुकी है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि मोदी के कांग्रेस को कोसने के पीछे एक वजह साफ है कि कांग्रेस जितनी कमजोर होगी, भाजपा उतनी ही मजबूत होगी। यही वजह है कि लोग उनके भाषण के कमोवेश यही मायने निकाल रहे हैं।
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