प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजदूर दिवस पर अपने को देश का मजदूर नंबर वन बताया। उन्होंने कहा कि अभी तक देश तथा दुनिया के मजदूरों को धोखा दिया गया है। जिन्होंने दुनिया के मजदूरों को एक होने का नारा दिया और उस नारे पर सरकारें बनाई, आज उनकी बातें खोखली साबित हो रही है। मोदी ने कहा कि मजदूरों की खुशहाली के लिए जरूरी है कि उनके घर में बिजली जले, धुआं रहित खाना बने, स्वास्थ्य की सुविधा मिले। कहा कि सबसे बड़ा केमिकल मजदूरों का पसीना होता है जिससे पूरी दुनिया को जोड़ा जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने गरीबी को बहुत करीब से देखा है। बचपन में मेरी मां चूल्हे पर खाना बनाती और मुझे खिलाती थी। इस परेशानी को करीब से महसूस करने की वजह से आज महिलाओं का दर्द बांटने मैं बलिया आया हूं। उन्होंने कहा कि देश के तीस लाख मजदूरों को पहले 15, 50 और 100 रुपये पेंशन मिलती थी। जिसे पाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। उनकी सरकार ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया है। देश तथा राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल पोर्टल भी लांच किया है।
मजदूरों के लिए बने प्राविधानों का सरलीकरण किया है। कहा कि लेबर आइडेंटिटी नंबर बन जाने से मजदूर कहीं भी रहे उसके उसका पीएफ प्रभावित नहीं होगा। मोदी ने पिछली सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि देश में अब तक जितनी भी सरकारें आई उन्होंने मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए कुछ नहीं किया। उनकी सरकार इसके लिए बेहतर प्रयास कर रही है।
एक मई मजदूर दिवस पर प्रधानमंत्री ने न केवल खुद को मजदूर नंबर एक कहा, बल्कि उन पार्टियों की भी खुली आलोचना की, जो पूरे देश और दुनिया में मजदूर दिवस मनाने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कार्ल मार्क्स के द्वारा कही गई यह बात दुनिया के मजदूरों एक हो पर अपनी बात केंद्रित करते हुए कहा कि जिन्होंने मजदूरों के एका की बात की उन्होंने मजदूरों को संघर्ष की आग में झोंक दिया। मजदूरों में वर्ग संघर्ष की बात कही और आज मजदूरों को कुछ नहीं मिला।