रामगढ़। दूबे छपरा में पार्कोपाइन विधि से बाढ़ व कटान को रोकने लिए 8.93 करोड़ रुपये से हो रहे कटानरोधी कार्य में धांधली का आरोप स्थानीय लोगों ने लगाया है। कंक्रीट और सरिया से बना पिलर जमीन पर रखते ही क्षतिग्रस्त हो जा रहा है। मौके पर एक भी पिलर ऐसा नहीं है जो क्षतिग्रस्त न हो। अधिकारियों की ओर से कंक्रीट का ग्रेड एम 50 बताया जा रहा है जबकि तकनीकी जानकारों के अनुसार ग्रेड एम 5 कंक्रीट को हथौड़े से तोड़ने पर जल्दी नहीं टूट पाता। सवाल उठता है कि ग्रेड एम 50 का कंक्रीट नदी में जाते ही क्यों चकनाचूर हो जा रहा है। ऐसे में पार्कोइन विधि से चल रहा कटानरोधी कार्य 25 हजार की आबादी को सुरक्षित करने से पहले जो खुद की रक्षा नहीं कर पा रहा है तो यह कार्य गांवों को कटान से कैसे बचा पाएगा। दूबे छपरा में चल रहे कटानरोधी कार्य का 11 मई को औचक निरीक्षण के दौरान बाढ़ विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अजय प्रताप श्रीवास्तव ने ठेकेदारों को चेताया था कि काम में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मानक में शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी थी। लेकिन आज भी मानक के विपरीत कार्य चल रहा है। कटान प्रभावित गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि अपने खेल में माहिर बाढ़ विभाग और उनके चहेते ठेकेदार अपनी रवैया बाज नहीं आ रहे। ग्रामीणों में पार्कोपाइन विधि से हो रहे कार्य को लेकर तरह-तरह के चर्चे भी शुरू भी हो गए हैं।
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पार्कोपाइन विधि से चल रहे कटान रोधी कार्य में सीमेंटेंड पिलर मानक के अनुसार तैयार किया जा रहा है। जो पिलर खराब हुए हैं उसे भी ठीक करने का कार्य चल रहा है।- भानु प्रताप सिंह, अधीक्षण अभियंता, बाढ़ खंड, बलिया।