जिला अस्पताल के ओपीडी में लगी मरीजों और तीमारदारों की भीड़। संवाद
बलिया। मौसम में बदलाव के बीच जिले में मौसमी फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार, गले में खराश, खांसी, कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तेज बुखार ठीक होने के बाद भी सूखी खांसी शरीर को तोड़ दे रही है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ मरीजों में बुखार कम होने के बाद भी खांसी लंबे समय तक बनी रह रही है। ओपीडी में इन दिनों 45 फीसदी से अधिक मरीज फ्लू जैसे लक्षणों के साथ उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में मंगलवार को करीब 1528 से अधिक मरीज इलाज को पहुंचे। इसमें सबसे ज्यादा मरीज फिजिशियन, बाल रोग व त्वचा रोग के ओपीडी में पहुंचे।
मौसमी फ्लू के बीच स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में भ्रम भी बना हुआ है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य मौसमी फ्लू और स्वाइन फ्लू1 के लक्षणों में ऐसा कोई निश्चित अंतर नहीं है, जिससे घर पर दोनों की पहचान की जा सके।
दोनों में अचानक बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए केवल तेज बुखार या खांसी के आधार पर किसी मरीज को स्वाइन फ्लू का संक्रमित मानना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच और प्रयोगशाला परीक्षण से ही संक्रमण की पुष्टि की जाती है।
जिले में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ने को देखते हुए जिला अस्पताल में मौसमी फ्लू और एच1एन1 की पहचान के लिए दो ओपीडी को फ्लू ओपीडी बनाया गया है। इनमें प्रतिरोज 230 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। सीएमएस डॉक्टर एसके यादव ने कहा कि मौसम के कारण वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
शासन के स्वाइन फ्लू के अलर्ट को लेकर दो फ्लू ओपीडी व 10 बेड का आइसोनलेशन वार्ड बनाने के साथ दवाएं व जांच उपलब्ध है।