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परिषदीय स्कूलों में अब मिड-डे-मील पर रहेगी ‘मां’ की नजर

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बलिया। परिषदीय स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले दोपहर के भोजन पर अब मां की नजर रहेगी। इसके जरिए भोजन की गुणवत्ता के साथ ही बच्चों को खाना परोसने के तौर-तरीकों और साफ सफाई पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए शासन की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। इससे मिड-डे मील में होने वाली हेराफेरी पर लगाम लगाई जा सकेगी। बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलेगा। बेसिक शिक्षा विभाग इसके लिए अभियान चलाने जा रहा है। सरकार ने इसे मां अभियान का नाम दिया है।
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अभियान के तहत छह सदस्यीय महिला समूह का गठन किया जाएगा। ये समूह नियमित भोजन की निगरानी करेगा। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को भोजन देने के लिए शासन की ओर से बकायदा मेन्यू तैयार किया हया है। हर दिन अलग-अलग तरह के भोजन पकाकर बच्चों को दिया जाना है। शासन भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर है, लेकिन स्कूलों में इसे लेकर मनमानी की जाती है। मेन्यू को दरकिनार किया जाता है। इसकी शिकायतें भी रोजाना आम होती है। इससे विभाग की होने वाली किरकिरी को देखते हुए शासन के निर्देश पर विभाग ने मिड डे मील की निगरानी के लिए छह महिलाओं का समूह गणित करने का फैसला लिया है। यह समूह प्रतिदिन खाने की गुणवत्ता को परखेगा। प्रतिदिन एक महिला विद्यालय जाकर मिड डे मील को चखेगी, जिसके लिए बाकायदा रोस्टर बनाया जाएगा। भोजन पकाने और परोसने की विधि को देखकर रिपोर्ट संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को दी जाएगी। एमडीएम के डीसी अजीत पाठक ने बताया कि मध्याह्न भोजन योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील की गुणवत्ता को देखने के लिए हर विद्यालय में छह सदस्यीय महिला समूहों का गठन किया जाएगा। समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के स्कूल में अध्ययनरत बच्चों के अभिभावकों के चयन का प्रावधान किया गया है।
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