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अब नौ दिवसों पर सजायफ्ता कैदी होंगे रिहा

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बलिया। सजायाफ्ता कैदी शिक्षक दिवस, अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर भी शर्तों के साथ रिहा हो सकेंगे। पहले केवल गणतंत्र दिवस, महिला एवं विश्व मजदूर दिवस, विश्व योग व स्वतंत्रता दिवस एवं गांधी जयंती के अवसर पर रिहाई का प्राविधान था। इसके अलावा साठ साल की आयु की की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है।
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शासन ने सजायाफ्ता कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए पहले के नियमों में संशोधन किया है। अब सजायफ्ता कैदी नौ विशेष दिवसों पर रिहा किए जाएंगे। इसके तहत जनपद के कारागार प्रशासन द्वारा चार कैदियों का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिन बंदियों ने 16 वर्ष की अपरिहार्य और 20 वर्ष की सपरिहार्य सजा पूरी कर ली हो, उसे प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर रखने पर रिहाई के लिए उपयुक्त माना जाएगा। वही पहले की 60 वर्ष की आयु पूरी करने की शर्त हटा ली गई है। संशोधित नीति में एक बिंदु जोड़ा गया है। जिसमें स्थाई नीति के तहत आजीवन कारावास की सजा से दंडित सिद्धदोष बंदी जिनकी समय पूर्व रिहाई से लोग व्यवस्था व जनहित प्रवाहित हो सकता है, उसकी रिहाई का प्रस्ताव समिति द्वारा निरस्त करा दिया जाएगा। प्रतिबंधित शर्ते 16 बिंदु है। इनमें से कोई भी बिंदु कैदी पर लागू होने की दशा में रिहाई नहीं मिलेगी। बताया कि जिला से चार सजायफ्ता कैदियों का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जिसमें 80 आयु वाले दो तथा 16 वर्ष से अधिक आयु वाले दो कैदी है। बताया कि शासन के निर्देशानुसार 80 वर्ष वाले कैदी जो 10 साल की सजा काट चुके है, उन्हें रिहा किया जाएगा। इसी प्रकार 16 वर्ष से अधिक वाले 16 साल की सजा काट चुके होंगे उनकी रिहाई की जाएगी।
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