बलिया। प्रधानमंत्री आवास के चयन में मनमानी की अब परतें खुलने लगी हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने दो साल के प्रधानमंत्री आवास की समीक्षा के दौरान पाया कि कई गांवों में अपात्रों का चयन योजना के लिए किया गया है। इसके लिए 20 गांव के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिले में पीएम आवास योजना का संचालन वर्ष 2015-16 में शुरु किया गया लेकिन धरातल पर वर्ष 2016-17 में उतरी। योजना के तहत सेक ( सामाजिक आर्थिक जातीय गणना) सूची में शामिल गरीबों को आवास देने का प्रावधान किया गया। सेक सूची में शामिल लाभार्थियों को आवास से संतृप्त करने के बाद वर्ष 2020-21 में पीएम आवास प्लस योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को आवास देने की प्रक्रिया शुरु हो गई। लेकिन हर वर्ष किसी न किसी गांव में अपात्रों के चयन की शिकायत मिलती रही। इसको लेकर अब मॉनीटरिंग तेज हो गई है। सीडीओ प्रवीण वर्मा ने आवास प्लस के तहत बीते दो वर्षों में आवंटित आवासों के निर्माण की समीक्षा की तो सामने आया कि सात ब्लॉकों के 20 गांवों में अपात्रों का चयन किया गया। जबकि चयन प्रक्रिया की पूरी जिम्मेदारी संबंधित सचिवों की थी। सीडीओ ने संबंधित गांवों के ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश पीडी को दिया। डीआरडीए के परियोजना निदेशक की ओर से 20 ग्राम पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसको लेकर विभाग में खलबली मची है। बताया जाता है अभी कुछ और सचिवों को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी में विभाग जुटा है।
पीएम आवास योजना की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। समय-समय इसकी मॉनीटरिंग की जाती है। अपात्रों के चयन के मामले में संबंधित सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।-देवनंदन दुबे, पीडी, डीआरडीए