बलिया। ‘द्वाबा के सम्मान और अभिमान के साथ ही सुदिष्ट बाबा पशु मेला की जमीन की हिफाजत करने के लिए मुझे जान भी देनी पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। मेरे जीते जी पशु मेला की जमीन पर किसी भी सांसद का रिश्तेदार कब्जा नहीं कर सकता।’ ये बातें बैरिया विधानसभा से भाजपा के विधायक सुरेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण गृह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि अब इस लड़ाई में पूर्व सांसद भरत सिंह का भी सहयोग मिल गया है। विधायक ने कहा कि मैंने इस मसले को सरकार और संगठन दोनों फोरम पर उठाया है। परिणाम स्वरुप सरकार मामले की जांच करा रही है और जांच पूरी होने तक पशु मेला की जमीन के भू लेखों पर किसी भी तरह के नामांतरण पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ पूर्ति के लिए सांसद ने मेरे बेटे पर दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। जबकि बैरिया नगर पंचायत की चुनावी रंजिश के परिणाम स्वरूप दो कोटेदारों के बीच विवाद हुआ था। खुद पर लग रहे आरोपों पर चुटकी लेते हुए कहा कि क्या युवाओं को रोजगार मुहैया कराना तस्करी है। पुलिस अधीक्षक के बारे में कहा कि एसपी की कुछ गतिविधियां मुझे अनुचित लगी। मैंने इसकी शिकायत सीएम से की। एसपी ने मुझे भरोसा दिलाया है कि द्वाबा में जिनके भी विरुद्ध फर्जी एफआईआर दर्ज कराया गया है उसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुरेंद्र को मिला भरत का साथ
बलिया। सुदिष्ट बाबा पशु मेला जमीन को लेकर सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और विधायक सुरेंद्र के बीच छिड़ी जंग में अब पूर्व सांसद भरत सिंह की भी इंट्री हो गई है। लंबे अरसे से राजनीतिक तौर पर एक दूसरे से दूर रहे भाजपा के दोनों छत्रप बृहस्पतिवार को न सिर्फ पीडब्लूडी के डाकबंगले में मिले बल्कि लड़ाई को धार देने पर गहन मंथन भी किया और भविष्य की रणनीति भी तैयार की। इसके बाद विधायक सुरेंद्र सिंह ने पत्रकार वार्ता में सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त पर जमकर तीर चलाये। यह दो दिग्गजों के मिलन का ही परिणाम रहा कि प्रेस वार्ता में विधायक के तेवर बदले नजर आये और उन्होंने सांसद पर हमला करने का कोई अवसर नहीं चूका। छोटे बड़े सभी सवालों पर न सिर्फ बेबाकी से बात की बल्कि मरते दम तक पशु मेला की जमीन की हिफाजत करने का वादा भी किया।