क्षेत्र के न्यू पीएचसी कर्ण छपरा में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। यहां वार्ड ब्वाय और चपरासी के सहारे अस्पताल संचालित हो रहा है। चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होने के चलते फार्मासिस्ट मरीजों का उपचार करता था लेकिन विगत दिनों फार्मासिस्ट का भी तबादला हो गया, ऐसे में वार्ड ब्वाय और चपरासी अस्पताल में रह गए हैं। अंत में 20 अगस्त से यह पीएचसी पूर्णतया बंद कर दिया गया है।
मालूम हो कि न्यू पीएचसी कर्ण छपरा के भवन को विगत चार वर्ष पूर्व प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मुरली छपरा अंगद राम ने आधे अधूरे स्थिति में संबंधित कार्यदायी संस्था से ले लिया था। यह पीएचसी एक फरवरी 2015 तक केवल कागजों में चलती रही। क्षेत्रवासियों के मांग के बाद यहां फार्मासिस्ट सुरेंद्र नाथ दुबे की नियुक्ति की गई। जिसके बाद वह मरीजों का इलाज जैसे-तैसे करने लगे।
इसी बीच 20 जुलाई को फार्मासिस्ट का स्थानांतरण अन्यत्र हो गया। लेकिन आज तक इस पीएचसी पर चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई। 20 अगस्त से यह पीएचसी बंद कर दिया गया। इस पीएचसी आज तक न तो बिजली और न ही पानी की व्यवस्था की गई। क्षेत्र के दुर्ग विजय सिंह, झलन, प्रधान प्रतिनिधि सामु ठाकुर, पवन कुमार सिंह, पूर्व प्रधान संतोष कुमार सिंह ने चेताया कि यदि तत्काल अस्पताल पर डॉक्टर व फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं गई तो हम क्षेत्रवासी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।