नरहीं। कार्तिक पूर्णिमा पर दशकों से लगने वाला चटनियां मेला इस वर्ष नहीं लगा। इसे लेकर लोगों में मायूसी देखने को मिली। दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल कोरोना काल में भी यह मेला लगा था, लेकिन फूड प्वाइजनिंग के मामले में दो चाट के दुकानदारों को पुलिस ने जेल भेज दिया। इसी वजह से इस साल दुकानदारों ने नरहीं गांव के पूरब मगई नदी के तट पर लगने वाले मेले से मुंह मोड़ लिया है।
नरहीं गांव निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक सर्वदेव राय ने बताया कि नरहीं गांव में मगई नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद मेले में झूला से लेकर हर तरह की दुकानें लगती थीं। निकट के कोट अंजोरपुर, मिल्की, मठिया, रामपुर, इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, बैरिया, नरहीं, कर्णपुरा, सोवंथा आदि गांवों के लोग भारी संख्या में चटनियां मेला में जुटते थे। यह मेला लगातार पांच दिन तक चलता था, लेकिन दुर्भाग्य की नरहीं गांव में लगने वाला मेला इस साल नहीं लगा है, जो चिंता की बात है। पूर्व अध्यापक शिवकुमार राय, अमरदेव राय, अनंत प्रसाद राय ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन बलिया में लगने वाले ददरी मेले के दिन से नरहीं गांव का मेला भी शुरू हो जाता था। हमलोग जब छोटे थे, तब पांच दिन तक मेले का खूब आनंद उठाते थे। नरहीं ग्राम प्रधान रामनारायण पासवान के कहा कि अगले साल से नरहीं में पुन: मेला लगाने का प्रयास किया जाएगा।