शुक्रवार को मीडिया के लोगों के मोबाइल पर चेयरमैन अजय कुमार समाजसेवी के पैड पर चार लाइनों का पत्र आया। उसमें उन्होंने नगर पालिका बलिया के ईओ पर फर्जी भुगतान कराने के लिए उनकी हत्या करा सकने का आरोप लगाया था।
पत्र के बाबत चेयरमैन से संपर्क किया गया तो उन्होंने पत्र भेजने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शुक्रवार को दोपहर में नपा के कर्मचारी मेरे गुदरी बाजार स्थित आवास पर आए और फर्जी भुगतान की फाइलों पर हस्ताक्षर के लिए दबाव बनाने लगे।
उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो उन्हें धमकी दी गई। उनसे पूछा गया कि आपने मीडिया के बजाय पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया तो उनका जवाब था कि दोपहर बाद का मामला है तो अब शनिवार को पुलिस अधिकारियों से मिलकर शिकायत दर्ज कराऊंगा।
उधर, अधिशासी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा ने बताया कि चेयरमैन धोबीघाट के निर्माण के लिए टेंडर डलवाना चाहते हैं जबकि ये मामला कोर्ट में है, इसलिए टेंडर से मना कर दिया गया। अब वे दबाव बनाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं।
पालिका कर्मचारियों का चेयरमैन और ईओ के आवास पर फाइलें लेकर जाना सामान्य बात है। वे न चेयरमैन के होते हैं न ईओ के। वे सरकारी कर्मचारी होते हैं। ऐसे में वे चेयरमैन को कैसे धमका सकते हैं।
यदि चेयरमैन को दिक्कत है तो उन्हें इसकी शिकायत उचित फोरम पर करनी चाहिए थी, लेकिन मामले को मीडिया के बीच ले जाने से उनका मकसद साफ हो गया है कि वे दबाव की राजनीति कर रहे हैं।