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Ballia News: बाढ़ के बाद कीचड़, दुर्गंध और जलभराव

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बाढ़ के बीद कीचड़। - फोटो : संवाद
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बलिया/मझौंवा/ दुबेछपरा। गंगा का जलस्तर एक मीटर घटने के बाद रविवार की शाम चार बजे गायघाट गेज पर स्थिर हो गया। नदी का जलस्तर तीन दिनों में एक मीटर नीचे जरूर उतरा है लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में दुश्वारियां कायम हैं।प्रभावित गांवों में कीचड़, दुर्गंध और जलभराव की समस्या है।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर रविवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 58.920 मीटर दर्ज किया गया।
गंगा का पानी खतरे के निशान 57.615 मीटर से 1.305 मीटर ऊपर बह रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक अमला राहत सामग्री वितरण करने में जुटा हुआ है। बाढ़ विभाग के एक्सईएन संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि नदी फिलहाल स्थिर है। जिले में गंगा व सरयू की बाढ़ से 154 गांवों में एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित हुई।
दया छपरा प्रतिनिधि के अनुसार गंगा का पानी लगभग एक मीटर तक घटा है। प्रभावित मार्गों से पानी निकल गया है। चारों तरफ कीचड़ या जलभराव है। जिससे संक्रमण का लोगों को खतरा है। हालांकि बाढ़ चौकी पर चिकित्सकों की टीम दवा आदि वितरित कर रही है। डॉक्टर मनोज कुमार उपाध्याय ने बताया कि सबसे ज्यादा सर्दी, बुखार के पीड़ित आ रहे हैं। मझौवां संवाददाता के अनुसार बाढ़ का पानी बस्तियों से निकलने लगा है। बाढ़ पीड़ित दीनानाथ तिवारी ने बताया कि जलभराव के बाद से मच्छर बढ़ गए हैं। जिससे मलेरिया, डेंगू का खतरा है। भुआल छपरा निवासी लकड़ी मिश्र ने बताया कि प्रशासन को अब इस तरह के खतरे से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए।
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टोंस नदी किनारे गंदगी का अंबार, बदबू से लोगों का जीना मुश्किल : चितबड़ागांव। नगर पंचायत क्षेत्र के चितेश्वर नगर वार्ड में टोंस नदी का जलस्तर घटने के बाद किनारे पर गंदगी का अंबार लग गया है। ईओ सुरेश कुमार मौर्य ने बताया कि विशेष अभियान चलाकर सफाई की जाएगी।
सागरपाली : क्षेत्र में टोंस और गंगा छाडन का जलस्तर बढ़ने के कारण थम्हनपुरा, हसनपुरा, इंद्रपुर , इन्द्रपुर नई बस्ती की बिजली एक सप्ताह से पूर्व बंद कर दी गई है। इससे पीड़ितों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ितों ने सांसद सनातन पांडेय को भी इसकी जानकारी दी है। उन्होंने एसडीओ बलिया से बात करते हुए कहा कि पीड़ितों के बीच तत्काल बिजली सप्लाई की जाए। नरहीं: करइल के टुटुवारी,मेड़वरा कलां, चुरैली,बघौना गांवों के किसानों की धान की फसलें पानी में डूबी हुई हैं। टुटुवारी निवासी कृष्णानंद राय बताया कि धान तो बर्बाद हुआ ही है रबी की खेती भी प्रभावित हो जाएगी।
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