बलिया। भले ही आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत केंद्र सरकार ने एमएसएमई को बढ़ावा देनें तथा गांवों में रोजगार के अवसर मुुहैया कराने की मंशा से आर्थिक पैकेज दे रखा हो,लेकिन जिले बैंकों की मनमानी के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ रही है। परिणाम स्वरूप अद्योगिक नजरिये से जनपद आज भी पिछड़ापन की मार झेल रहा है। बहुतेरे ऐसे बैंक हैं, जिन्होंने बगैर उचित कारणों के उद्यमियों को की फाइल को ऋण देने से या तो मना कर दिया या फिर उनकी फाईल वापस लौटा दी। जिस कारण नव उद्यमियों को लघु और कुटीर उद्योगों के संचालन में कठिनाई आ रही है। हालांकि सरकार का पूरा फोकस लघु उद्योगों के माध्यम से गांव में प्रवासी कामगारों को रोजगार मुहैया कराने पर है। इसके लिए एमएसएमई योजना के तहत लघु व कुटीर उद्योग को विस्तारित करने की कार्य योजना पर कार्य किया जा रहा है, लेकिन बैंकों की मनमानी और असहयोग की भावना ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा रहीं है। विशुनपुरा निवासी अजय कुमार ने करीब एक वर्ष पूर्व ऋण के लिए आवेदन किया था, उनकी पत्रावली प्रधानमंत्री रोगार सृजन योजना के तहत जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास विभाग द्वारा स्वीकृत होकर बैंक गई,लेकिन बैंक ने बिना कोई समुचित कारण बताये फाइल को वापस कर दी। जिससे वह काफी निराश हुआ। इस प्रकार निधरिया के संजय कुमार के जाली-जंगला उद्योग, श्रीगणपति की मिल्क प्रोडेक्ट,राजेन्द्र नगर निवासी रिंकू कुमार के आटोमोबाइल से जुड़े उद्यम लगाने की पत्रावली पर संबंधित बैंकों ने ऋण देने की बजाय फाइल वापस लौटा दी। इसके अलावा जिले के ऐसे सैकड़ों युवा है जो एमएसएमई के तहत उद्यम लगाने के इच्छुक तो है,लेकिन बैंकों की मनमानी का शिकार होकर बेरोजगार है।
------------
जिले में लघु व कुटीर उद्योगों के विकास में बाधक संवादहीनता भी है,जिसके तहत उद्यमी बैंकों के सामने अपना प्रजेंटेशन ठीक ढ़ंग से नहीं कर पाते। साथ बैंकों के इर्द-गिर्द मंडरा रही दलालों की फौज भी नये उद्योगों के आड़े आ रही है। बावजूद इसके जिले में लघु व कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा सतत प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत बैंकों से वापस लौटने वाली फाइलों को पुनर्विचार कर ऋण स्वीकृत करने के लिए भेजा जा रहा है।
राजीव पाठक
उपायुक्त,जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास केंद्र