इलाके के लोग बता रहे तीन दिन से मौके पर नहीं हो रहा है कोई भी काम
रामगढ़। मानसून आने के साथ ही 5 दिनों से कटानरोधी कार्य पर विराम लग गया है। दुबे छपरा, नौरंगा, गंगापुर में फिलहाल कोई भी कार्य नहीं हो रहा है। सोनारटोला के लोगों का कहना है कि तीन दिनों से कटान निरोधक कार्य नहीं किया जा रहा है, जबकि विभाग यह बात मानने को तैयार नहीं है। गंगापुर व सोनारटोला में हो रहे कार्य में मानक की अवहेलना की जा रही है। गंगापुर से पूरब 250 मीटर लंबा कार्य करना है। तलहटी से 6 मीटर चौड़ा प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर बेश तैयार किये जा रहे हैं और ये बोरियां भी कहीं डाली जा रही हैं तो कहीं ऐसे ही छोड़ दी जा रही हैं। इसके बाद ही पांच मीटर चौड़ी लोहे की जाली में बोल्डर डालकर 13.50 मीटर ऊपर से कार्य करके बेस बनाया जा रहा है। सोनारटोला से पूरब 200 मीटर कार्य करना है जबकि छह मीटर की जगह तीन मीटर ही बोल्डर डालकर बेस तैयार किया गया है। साथ ही दो मीटर की जाली में बोल्डर भरकर कार्य किया जा रहा है। गंगापुर और सोनारटोला के बीच 450 मीटर का फासला है, जबकि कटानरोधी कार्य 400 मीटर में ही चल रहा है।
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ड्रेजिंग कार्य को लेकर जताई चिंता
रामगढ़। पचरुखिया मौजे में बैराजखंड वाराणसी की ओर से गंगा नदी की धारा मोड़ने के लिए ड्रेजिंग कार्य को लेकर बाढ़ पीडि़तों को चिंता सताने लगी है कि बारिश शुरू होने पर कैसे कार्य को पूरा किया जायेगा। विभाग दावा कर रहा है कि तीस दिन में प्रथम चरण का काम पूरा कर लिया जायेगा। कार्य की रफ्तार देखकर ऐसा नहीं लग रहा है कि विभाग लक्ष्य को हासिल कर पाएगा। बैराजखण्ड वाराणसी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमें जब वॉटर लेबल तक खुदाई करके दिया जायेगा तब 30 दिनों में 500 मीटर ही ड्रेजिंग मशीन द्वारा खुदाई कर पायेंगे। नदी की धारा मोड़ने के लिए लगभग 16 जेसीबी मशीन लगाई गई हैं, खुदाई से निकले बालू युक्त मिट्टी के टीले अब पहाड़ जैसे खड़े कर दिये गए हैं। ये आने वाले दिनों में खतरनाक मंजर को आमंत्रित कर रहा है। बाढ़ आने से पूर्व अगर ड्रेजिंग का कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो ये खुदाई ही मुश्किलें पैदा कर सकती है। मिट्टी का ढेर बारिश के पानी से बहकर खुदे गड्ढों में ही जा रहा है। ऐसे में एक तरफ खुदाई और दूसरी तरफ बारिश के पानी की धारा से गड्ढा भरना विभाग के लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है। यदि समय रहते मिट्टी को नहीं हटाया गया तो नदी की लहरें बैकरोलिंग करते हुए एनएच-31 पर टकरा सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो बंधे के उत्तर दिशा में बसे लाखों की आबादी को बाढ़ की चपेट में आने से कोई नहीं रोक सकता।
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मानसून की वजह से खुदाई कार्य में अवरोध उत्पन्न हो रहा है। मौसम साफ होते ही संसाधन बढ़ाकर कार्य को 30 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने का प्रयास कराया जाएगा।-विनय चंद्र भारती, अवर अभियंता, बैराज खंड वाराणसी