बलिया। प्रदेश सरकार के कैबिनेट के तीन मंत्रियों पर बलिया बलिदान दिवस की परंपरा के विपरीत आचरण का आरोप लगाते हुए सत्यप्रकाश उपाध्याय मुन्ना ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
शेरे बलिया चित्तू पांडेय के रिश्तेदार सत्यप्रकाश उपाध्याय ने पत्र में उल्लेख किया है कि भारत छोड़ो आंदोलन के तहत जनपद का अलग महत्व है। बलिया इकलौता ऐसा जिला है जहां 1942 में 78 क्रांतिकारी अंग्रेजों की गोलियां का निशाना बने।
बलिया को पांच साल पहले ही क्रांतिकारियों ने आजाद करा लिया था। इसकी याद में बलिया बलिदान दिवस मनाया जाता है। इसका भारत रतन पं. जवाहरलाल नेहरु ने अपनी चर्चित पुस्तक भारत एक खोज में उल्लेख किया है।
कुछ वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस कार्यक्रम की परंपरा के विपरीत आचरण किया जा रहा है। 1942 में क्रांतिकारियों ने जेल से रिहा होने के बाद जिस स्थान पर सभा करने के बाद स्वतंत्र सरकार का गठन किया।
आपके कैबिनेट मंत्रियों ने उस स्थान पर सभा करना बंद कर दिया है। इस वर्ष कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को कांग्रेसजनों के निमंत्रण देकर बलिया बलिदान दिवस पर बुलाया था।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह नौ बजे जेल का फाटक जिलाधिकारी को खोलना था। निर्धारित समय पर कैबिनेट के तीनों मंत्री समय से नहीं पहुंचे। कार्यक्रम के अनुसार 8:50 पर जेल का फाटक खोलकर सेनानी सहित उनके उत्तराधिकारी भीतर बुलाए जाते हैं। तत्पश्चात 9:00 बजे जेल का फाटक खोला जाता है, इस बार जब नौ बज गया तब मंत्री और जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे।
इसके बाद जिलाधिकारी ने जेल का फाटक खोला। जेल से प्रतिकात्मक रूप से सेनानी एवं उनके उत्तराधिकारी नारे लगाते हुए निर्धारित समय पर जेल से बाहर निकले। कैबिनेट के तीनों मंत्री जेल के अंदर ही रह गए।
तीनाें मंत्री सर्वदलीय जुलूस में भी शामिल नहीं हुए। इसके बाद मंत्रियों ने दोबारा जेल का फाटक खोलकर अपना अलग जुलूस निकालकर बलिया बलिदान दिवस को अपमानित करने का काम किया। ऐसे में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।