बहादुरपुर की घटना (19 मार्च) को हुए अभी ज्यादा दिन नहीं बीते। लेकिन प्रशासन ने उससे कोई सबक लिया हो ऐसा नहीं लगता। अब शिक्षा क्षेत्र बांसडीह के खोरौली गांव स्थित जूनियर हाईस्कूल में हालात देख लें तो इसे खुद ही समझ जाएंगे।
यहां मध्याह्न भोजन बनाने के लिए न तो कोई कमरा है और न ही प्रांगण में कोई जगह है। यहां पिछले कई महीनों से बंसवार के नीचे मिड-डे-मील बनाता आ रहा है। हालांकि यहां भोजन बनाना उनकी मजबूरी बताई जा रही है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक का कहना है कि कई बार इसके बारे में उच्चाधिकारियों को लिखित सूचना दी है।
लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। उधर बांस के कोठ के नीचे भोजन बनने से अभिभावक भयजदा हैं। बहादुरपुर में मिड डे मील कांड (खाना खाकर 139 बच्चों के बीमार पड़ने की घटना) के बाद से तो अभिभावक और भी खौफजदा रहते हैं।
बंसवार में खाना बनने की वजह से उसमें जहरीले कीड़े-मकोड़े आदि के गिरने का हमेशा भय बना रहता है। लगता है यहां पर भी प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार है। हालांकि सबकुछ जानने के बाद भी शिक्षा विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक रवींद्र तिवारी ने बताया कि मेरे द्वारा इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों से पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। लेकिन अधिकारियों ने सुविधा मुहैया कराने से टाल-मटोल कर देते हैं। अब विवश होकर मिड-डे-मील का भोजन रसोइयों द्वारा बंसवार के नीचे बनाना पड़ रहा है।
इस संबंध में अभिभावक दीपचंद्र राजभर, राजू राजभर, सुरेंद्र राजभर, शंभू राजभर का आरोप है कि विभाग की उदासीनता के कारण मिड-डे-मील का भोजन बसवार के नीचे बनाया जाता है। कहा कि इत्तेफाक है कि अब तक कोई अप्रिय धटना घटित नहीं हुई है।
खुदा न खास्ता कोई अप्रिय घटना घटित हो गई तो बच्चों को कोई नहीं बचा सकता। उन्हाेंने जिलाधिकारी का का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बसवार के नीचे बन रहे मिड-डे-मील का भोजन को तत्काल वहां से हटाने और दूसरे स्थान पर बनवाने की मांग की।
इस बाबत सह समन्वयक बांसडीह एनामुल हक ने बताया कि इसकी जानकारी विभाग को है। लेकिन बजट के अभाव में किचेन शेड नहीं बन पा रहा है। बताया कि इसकी वैकल्पिक व्यवस्था शीघ्र कर दी जाएगी।