बैरिया तहसील के पचरुखिया में गंगा नदी पर बने स्पर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहां कुल 14 स्परों में सात स्पर पहले से ही क्षतिग्रस्त हैं, अन्य की हालत भी ठीक नहीं है। इसके चलते तटवर्ती लोग सहमे हैं। इस बार बाढ़ आई तो चौबेछपरा, केहरपुर, श्रीनगर, दूबेछपरा, उदइछपरा, गोपालपुर सहित दर्जनों गांवों का अस्तित्व मिट सकता है। यही हालत नरदरा, भुसौला पर बने स्परों की भी है।
मालूम हो कि डीएम राकेश कुमार गत सप्ताह पहले पचरूखिया, लालगंज, इब्राहिमाबाद नौबरार में पहुंचे थे और क्षतिग्रस्त स्परों को देखा था। मानसून से पहले ही बाढ़ निरोधक कार्य कराने का अधिशासी अभियंता आरएस यादव को निर्देश दिया था। जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद लोगों को उम्मीद थी कि मानसून से पहले बाढ़ निरोधक कार्य शुरू हो जाएगा। हालत यह है कि अब तक कहीं पर भी विभाग ने बाढ़ निरोधक कार्य आरंभ नहीं कराया है।
स्थानीय ग्रामीणों रामसेवक पांडेय, हरेश्वर यादव, दिवाकर यादव, राजेंद्र यादव आदि का कहना है कि जिला प्रशासन और बाढ़ विभाग को कटान पीड़ितों के दर्द से कोई लेनादेना नहीं हैं। दर्द रहता तो गंगा और घाघरा के मुहाने पर बसे गांवों का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ होता।
अब तक अरबों रुपये खर्च कर डेंजर जोन पचरुखिया, इब्राहिमाबाद नौबरार, नरदारा, भुसौला समेत दर्जनों स्पर तथा जीओ विधि से प्लेटफार्म बनाए गए। बावजूद न तो गांव ही बच सके और ना ही बंधे सुरक्षित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन और बाढ़ विभाग की उदासीनता का आलम यह है कि दर्जनों गांव गंगा और घाघरा में समा गए। बावजूद इनकी नींद नहीं टूटी। अगर इसी प्रकार जिला प्रशासन और बाढ़ विभाग आंखें बंद रखेगा तो वह दिन दूर नहीं, जब गंगा दर्जनों गांव का अस्तित्व मिटाते हुए माझा गांव तक तक चली जाए।