नगर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आग को बुझाने के लिए कुल 30 हाइड्रेंट लगाए गए थे ताकि आग पर त्वरित अगिभनशमन कार्रवाई कर सकें। लेकिन ये सभी हाइड्रेंट शोपीस बने हुए है। कारण कि एक-दो को छोड़ दिया जाय तो सभी हाइड्रेंट सड़क में दब गए है। वहीं कुछ देखरेख के अभाव में जाम हो गया है। ऐसे में अगर नगर में आग लग गई तो अगिभनशमन विभाग को आग पर काबू पाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
मालूम हो कि बेल्थरारोड, बांसडीह, बैरिया एवं सदर तहसील में हर साल आग की विनाशकारी लीला जारी रहती है। इससे निजात दिलाने के लिए नगर के विभिन्न स्थानाें पर कुल 30 हाइड्रेंट बनाए गए। ताकि नगर में कहीं किन्हीं कारणवश आग लगती है तो इसकी मदद से उस पर तत्काल काबू पाया जा सकें। लेकिन एक-दो को छोड़ दिया जाय तो सभी हाइड्रेंट सड़क में दब गए है तो एक-दो देखरेख के अभाव में जाम हो गए है। ऐसे में अगर नगर में आग लगती है तो आग पर काबू पाना अगिभनशमन विभाग के लिए कड़ी चुनौती होगी।
नगर में नगरपालिका विभाग द्वारा सड़क तो बनाया गया। लेकिन हाइड्रेंट को ऊपर उठाने के बजाय उसे सड़क में दबा दिया गया। करीब 85 फीसदी से ज्यादा हाइड्रेट चोक पड़े हुए हैं। संबंधितों को थोड़ी परवाह नहीं कि अगर नगर में आग लगे तो क्या होगा। यही हाल जल निगम विभाग का है। जल निगम एवं अगिभनशमन विभाग सड़क निर्माण के दौरान कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि हाइड्रेंट सही सलामत है या नहीं। इसमें नगरपालिका विभाग के साथ ही जल निगम व अगिभनशमन विभाग की भी लापरवाही दिख रही है। ऐसे में अगर नगर में कहीं आग लगती है और नुकसान होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?