रेवती क्षेत्र के विशुनपुरा मौजा में बोई गई मक्का की फसल पर टिड्डियों के प्रकोप के जद में आने से खर?
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रेवती। रेलवे स्टेशन रेवती के दक्षिण स्थित विशुनपुरा मौजा में काली मिट्टी पर बोई गई मक्के की फसल पर टिड्डियों का भारी प्रकोप होने से किसानों आर्थिक नुकसान होने की आसंका जताई जा रही है। लगभग एक सप्ताह पूर्व टिड्डियों का अचानक मक्के की फसल पर इतना तेज आक्रमण हुआ कि किसानों के लाख प्रयास के बाद भी मक्के के पौधे पत्तियां विहीन दिखने लगी हैं।
किसानों के अनुसार टिड्डियों का दल मक्का की फसल के अंग-अंग पर छा गए। इनके बैठने के साथ ही पौधों की पत्तियों में छिद्रों का जाल बन गया। मक्के की हरी पत्तियां टिड्डियों का ग्रास बनती गईं। देखते देखते भरपूर हरे भरे लम्बे लम्बे पत्तों वाले मक्के के पौधे जगह-जगह कंकाल होकर रह गए हैं। कई एक जगह तो स्थिति यह है कि मक्के की हरीतिमा गायब है। सिर्फ पौधे का डंठल वाला हिस्सा ही दिखाई पड़ रहा है।विशुनपुरा मौजा के किसान इस सत्र में लगभग 50 बीघे मक्का की खेती किए हैं। पांच बीघे खेत में मक्का की खेती किए श्रीकान्त पाण्डेय, सात बीघे की खेती किए प्रवीण ओझा तथा राजू पाण्डेय ने बताया कि मक्का की बोआई में अब तक प्रति बीघा लगभग दस हजार रुपए लग चुके हैं। बताया कि एक बीघे में सात किलो बीज लगा है। 210 के करीब प्रति किलो के हिसाब से बीज, उर्वरक, के अलावा जुताई, बोआई, कीटनाशक दवाओं का निरन्तर छिड़काव आदि किया गया। तमाम प्रकार की मजदूरियां आदि यदि जोड़ा जाए तो लागत दस हजार आएगी। उस पर भी सही उपज हो जाती तो कुछ न कुछ लाभ अवश्य हो जाता। क्योंकि इस बार फसल काफी अच्छी थी। किसानों ने बताया टिड्डियों का प्रकोप इसी प्रकार जारी रहा तो घर कुछ भी नहीं आ पाएगा। क्षेत्र के कई अन्य स्थानों से भी टिड्डियों के आतंक की सूचना आ रही है। इस मौजे के रेवती निवासी मुन्नू पाण्डेय ने पांच बीघे, ददन चौधरी ने चार बीघे, बब्बन राजभर दो बीघे, रामनाथ पाण्डेय ने ढाई बीघे, रामजी पटेल ने डेढ़ बीघे, राजन चौधरी ने दो बीघे, उमा पाण्डेय तथा प्रेम नारायण पाण्डेय ने डेढ़-डेढ़ बीघे, शिव कुमार चौधरी तथा रामजी पटेल डेढ़-डेढ़ बीघे मक्के की खेती की है। अन्य कई किसानों ने भी छोटी खेती की है। सभी ऐसे किसान इस बार मक्के की खेती करके पश्चाताप कर रहे हैं। कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के बाद भी टिड्डी मर तो रही हैं लेेकिन फिर कहां से पैदा हो जा रहीं हैं कहा नहीं जा सकता। टिड्डियों का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। समझ में नहीं आता कि क्या करें।