बलिया। उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाला गंगा पर बना वीर कुंवर सिंह सेतु की मरम्मत छह साल बाद भी नहीं हो सकी। इस जर्जर पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। इसके चलते सीमावर्ती लोगों को परेशानी तो हो रही रही है, कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
कुंवर वीर बहादुर सिंह सेतु का शुभारंभ 15 जुलाई 1977 को हुआ था। बीच में कई बार पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण मरम्मत हुई। वर्ष 2014 में एकबार फिर पुल क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के ज्वाइंटर खराब होकर नष्ट हो गए। इसके दुर्घटना की आशंका है। पुल के रखरखाव व मरम्मत की जिम्मेदारी बिहार सरकार के पास है लिहाजा पुल को बंद करने की कवायद शुरू की गई लेकिन वर्ष 2014 में हो रहे लोकसभा चुनाव को देखते हुए समय टलता गया। 12 मई 2014 को जिले में अंतिम चरण का चुनाव संपन्न हुआ और इसी दिन रात में बिहार प्रशासन ने पुल को भारी वाहनों के आवागमन को बंद कर दिया। पुल के दोनों सिरे पर आठ फुट ऊंची हाईट गेज लगा दी। आठ फुट ऊंचे तक के वाहन निकलते रहे तो इसकी ऊंचाई एक फुट तक घटा दी। साढ़े चार साल पहले इलाहाबाद की एक एजेंसी को पुल मरम्मत की जिम्मेदारी दी गई और महीनों तक मरम्मत कार्य चला। पुल के बंद होने के कारण इस रास्ते होने वाले विभिन्न कारोबार प्रभावित हो गए हैं। पुल पर भारी वाहनों का आवागमन बंद होने के कारण इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। छोटे वाहनों से बिहार की ओर से लाल बालू, सरिया, चंदन की लकड़ी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेडिमेड लाए जाते हैं वहीं यूपी से पशु, खाद्यान्न, देश व अंग्रेजी शराब, प्लास्टिक सामग्री बिहार भेजी जाता है।
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गड़हांचल के गांवों का मुख्य बाजार है बक्सर
बलिया। यूपी व बिहार की सीमा से सटे गड़हांचल के गांवों का मुख्य बाजार बक्सर (बिहार) ही है। गाजीपुर जिले के कई गांवों के लोग भी खरीदारी के लिए बक्सर जाते हैं। पुल पर हाईट गेज लगने के कारण छोटे मालवाहक वाहन भी नहीं चल पा रहे हैं लिहाजा सामानों को ले आने के लिए रिक्शा व ठेले का सहारा लेना पड़ता है जो काफी महंगा होता है। शादी-विवाह व किसी बड़े आयोजनों के लिए खरीदारी करने के बाद लोगों को सामानों को बक्सर से ले आने में परेशानी उठानी पड़ती है।
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लाल बालू का आवक प्रभावित, कीमत बढ़ी
बलिया। भरौली-बक्सर गंगा पुल के बंद होने का सबसे अधिक लाल बालू के आवक पर हुआ है और इसके चलते जनपद में लाल बालू काफी महंगा हो गया है। बताया जाता है कि लाल बालू का मुख्य खदान बिहार प्रांत के कोईलवर में है। कोईलवर से यूपी की सीमा में प्रवेश के लिए सबसे नजदीक रास्ता बक्सर-भरौली गंगा पुल ही है। पुल के बंद होने के पहले करीब तीन सौ ट्रकें रोजाना लाल बालू लेकर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करती थीं और इसी रास्ते गाजीपुर, मऊ, गोरखपुर, गोंडा, आजमगढ़ आदि जनपदों में लाल बालू पहुंचता था। लेकिन पुल के बंद होने के कारण ट्रकें गाजीपुर या जयप्रभा सेतु मांझी के रास्ते आ रहीं हैं लिहाजा खर्च बढ़ने के कारण लाल बालू भी महंगा हो गया है।
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जनप्रतिनिधियों की ओर से नहीं की जा रही कवायद
बलिया। साढ़े पांच साल से बंद भरौली-बक्सर गंगा पुल पर भारी वाहनों के आवागमन शुरू कराने को लेकर जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि बलिया के सांसद भरत सिंह की ओर से कुछ प्रयास किया गया था लेकिन परवान नहीं चढ़ सका। बताया जाता है कि यूपी के बलिया व बिहार के बक्सर के सांसद केन्द्र में सत्ता पक्ष से संबंधित हैं, इसके बावजूद छह साल से अधिक समय से बंद पुल को चालू कराने को लेकर कवायद नहीं की जा रही है। हैरानी की बात है कि यूपी में जहां भाजपा की सरकार है वहीं बिहार में भाजपा समर्थित सरकार है।