बलिया। समाज में लैंगिक विषमता की खाई पाटने और कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से भले ही प्रदेश की योगी सरकार द्वारा कन्या सुमंगला योजना का संचालन किया जा रहा है, लेकिन जिले में एक बड़े तबके को इसका लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली आधे से अधिक आबादी को इस योजना की जानकारी ही नहीं है। जिले में 51179 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें अब तक केवल 9697 बालिकाओं को योजना का लाभ मिला। जांच के दौरान 41482 का आवेदन पत्र विभिन्न कारणों से निरस्त हो गया। योजना के तहत करीब एक करोड़ 14 लाख 65 हजार रुपये की धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेजी गई है। जबकि करीब 4125 ऑनलाइन आवेदन सत्यापन के अभाव में लंबित हैं।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के संचालन के लिए जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति बनी है। इसके अध्यक्ष जिलाधिकारी और सचिव जिला प्रोवेशन अधिकारी हैं। समिति में अन्य सदस्य भी हैं। समिति द्वारा योजना के संचालन की निगरानी की जाती है। शहरी क्षेत्रों के आवेदकों के आवेदन पत्र की जांच और सत्यापन एसडीएम तथा ग्रामीण क्षेत्रों का सत्यापन बीडीओ करते हैं। इसके बाद जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति आवेदन को पात्रता के लिए अग्रसारित करती है। इसके बाद लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जाती है।
कन्या भ्रूण हत्या रोकना योजना का उद्देश्य
जिला प्रोवेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज ने बताया कि महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित कन्या सुमंगला योजना की शुरुआत एक अप्रैल 2019 को हुई। इस योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह रोकने के बेटी पढ़ाओ- बेटी बचाओ अभियान को गति प्रदान करना है। योजना का लाभ पाने के बालिका के माता-पिता को प्रोवेशन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। बालिका के जन्म लेने पर दो हजार, टीकाकरण होने पर एक हजार रुपये, कक्षा पांच में दाखिला के लिए दो हजार, छह में दाखिला पर दो हजार, कक्षा नौ में दाखिला पर तीन हजार रुपये मिलते हैं। कक्षा दस पास कर डिप्लोमा करने पर पांच हजार, 12वीं कक्षा पास कर स्नातक में प्रवेश के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते हैं। योजना के तहत विभिन्न चरणों में बालिकाओं को जन्म से लेकर स्नातक तक की शिक्षा के लिए कुल 15 हजार की धनराशि छह किश्तों में दी जाती है।
कोरोना के कारण नहीं मिला लक्ष्य
जिला प्रोवेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में कन्या सुमंगला के तहत शासन द्वारा 22हजार लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया। जिसके सापेक्ष करीब 40हजार लोगों ने आवेदन किया था। जिसकी जांच के बाद लक्ष्य के सापेक्ष आठ हजार पांच सौ पात्रों को लाभ पहुंचाया गया। जबकि शेष 31हजार पांच सौ का आवेदन जांच के दौरान निरस्त कर दिया गया। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2020-21 में कोरोना के कारण शासन द्वारा कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। अब तक 11179 लोगों ने आवेदन किया है, जिनमें 1197 आवेदन जांच में सहीं पाये गये। इस दौरान 5857 आवेदन पत्र अस्वीकृत कर दिया गया। जबकि 4125 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित है।
दो बच्चों वाले माता-पिता हैं हकदार
योजना का लाभ लेने के लिए परिवार में दो से ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए। दोनों बच्चों में से एक पुत्री या दोनों पुत्री होंगी तो योजना का लाभ मिलेगा। ऑनलाइन आवेदन के लिए पुत्री का जन्म प्रमाण पत्र, तीन लाख रुपये सालाना से कम आय होना अनिवार्य है। बताया कि आवेदन योजना के कुल छह: चरणों के दौरान लाभ के लिए आवेदन कर सकते है, लेकिन जिस चरण में आवेदन किया जायेगा। उसके बाद की धनराशि ही लाभार्थी को अनुमन्य होगी।
वेबसाइट बंद होने से प्रभावित है योजना का कार्य
जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज ने बताया कि मेंटेनेंस के कार्य के कारण वेबसाइट बीते दो नवंबर से बंद है। जिसके माध्यम से कन्या सुमंगला योजना के लाभ के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। इस नाते विभाग में डंप पड़े करीब 1042 आवेदन पत्रों का सत्यापन नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही वेबसाइट के पुन: चालू होने की सूचना है। उसके बाद लंबित आवेदन पत्रों का यथाशीघ्र निपटारा किया जायेगा।