बेल्थरारोड। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से गरीबों को छत देने के लिए वर्षों पूर्व निर्मित कांशीराम और आसरा आवास आवंटन का मामला पिछले एक साल से अधर में लटका हुआ है। हालांकि आवास आवंटन के पात्र लोगों की सूची तैयार कर ली गई है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से अभी तक आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इससे पात्र लाभार्थियों में रोष व्याप्त है। अब तक आवंटन नहीं होने से आवास खाली पड़े हुए हैं। रख-रखाव के अभाव में आवासों की हालत भी खस्ता हाल हो गई है। विभाग का कहना है कि बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होने से इसका आवंटन नहीं हो रहा था। उक्त सुविधाओं के अभाव में भी जरूरतमंद आवास को लेने के लिए इच्छुक हैं।
शहरी गरीबों और निराश्रितों को छत मुहैया कराने के लिए बसपा सरकार में कांशीराम शहरी आवास योजना शुरू की गई थी। जिला पंचायत के डाक बंगला परिसर में करोड़ों की लागत से 36 आवास बनाए गए। आवास तो बनकर तैयार हो गए लेकिन यहां बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई। बसपा सरकार में प्रावधान किया गया था कि आवास के बनने के बाद बिजली विभाग, जलनिगम और नगर निकाय के सहयोग से वहां बिजली, पानी और जल निकासी की व्यवस्था की जाएगी। सरकार बदलने के बाद ये संभव नहीं हो पाया। डूडा की ओर से बिजली, पानी संयोजन और जल निकासी के लिए अलग से बजट जारी कराने का प्रयास किया गया, लेकिन ये संभव नहीं हुआ। इसी खींचतान में आवासों के हैंडओवर में काफी देर हुई और इनकी हालत भी जर्जर होने लगी। बेल्थरारोड में भी ऐसे ही 36 आवासों का आवंटन अब तक नहीं हो पाया था। एक वर्ष पूर्व बिना आवंटन के आवास में रह रहे गरीबों से अधिकारियों ने जांच और आवंटन प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर इसे खाली कराया था। उस समय ऐसा लगा कि शीघ्र ही गरीबों को आवास आवंटित हो जाएगा। परंतु अधिकारियों की उदासीनता से निर्माण के एक वर्ष बाद भी गरीबों को छत मुहैया कराने की योजना साकार नहीं हो सकी। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि आवास आवंटन के लिए पात्रों की लिस्ट तैयार कर ली गई है। आवंटन प्रक्रिया को लगभग पूर्ण कर लिया गया है। आवंटन के सापेक्ष आपत्तियां लेकर उसका निस्तारण भी कर दिया गया है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होते ही इसका आवंटन कर दिया जाएगा।