भृगु की तपोस्थली पर कार्तिक माह के पहले दिन मंगलवार को गंगा तट पर कल्पवास करने के लिए साधु-संत तथा गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग पहुंचने लगे हैं।
कई लोगों ने अपना डेरा-डंडा डाल दिया है। इस माह प्रतिदिन गंगा स्नान का महात्म्य है। सैकड़ों महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने मंगलवार को गंगा में डुबकी लगाई।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास के पहले दिन से ही सृष्टि के सभी देवी-देवता, यक्ष, गंधर्व, दैत्य-दानव, मानव, महर्षि भृगु के क्षेत्र में कल्पवास करने आते हैं।
यहीं नहीं पितृगण, देवगण के साथ ही सारी नदियां और सरोवर भी भृगु क्षेत्र में आकर निवास करती हैं। कार्तिक मास में कल्पवास करना तथा स्नान करने का विशेष महात्म्य है।
इसके अंतर्गत दूरदराज से साधु-संत के साथ ही गृहस्थ लोग कल्पवास करने भृगु क्षेत्र के गंगा तट पर पहुंचे। गंगा में स्नान किया और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्तिक मास के पहले दिन से गंगा तट पर चहलकदमी बढ़ गई है। वहीं खानपान के दूकानदारों ने भी अपना डेरा जमा लिया है।