शासन के मुताबिक सहतवार टीएसटी बंधे के पास उनकी पुलिस चौकी चल रही है और एक एसआई और चार कांस्टेबिल वहां तैनात हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इस पुलिस चौकी का वजूद 1986 में घाघरा नदी के कटान के चलते खत्म हो चुका है और यहां तैनात पुलिसकर्मियों को सहतवार थाने से संबद्ध कर दिया गया है।
1980 में टीएसटी बंधे से लगायत उस पार बिहार के सिवान जिले से बड़े पैमाने में तस्करी का धंधा फल-फूल रहा था। क्षेत्रीय लोगों की मांग पर इसी वर्ष यहां एक पुलिस चौकी बनाई गई। यहां एक एसआई के साथ ही चार कांस्टेबिलों की तैनाती भी की गई। नतीजन धीरे-धीरे इस क्षेत्र से तस्करी का धंधा बंद हो गया था। लेकिन 1986 में घाघरा के कटान ने इसका वजूद ही मिटा दिया।
तब से फिर इस दिशा में किसी ने रुचि नहीं दिखाई और नहीं जिला प्रशासन ने इससे शासन को अवगत कराया। नतीजतन शासन आज भी यही मानते हैं कि एक पुलिस चौकी टीएसटी बंधे पर चल रही है और यही सोचकर आज भी यहां एक एसआई और चार कांस्टेबिलों की तैनाती होती चली आ रही है, जबकि यहां के लिए तैनात पुलिसकर्मी सहतवार थाने से संबंध कर दिया गया है। इसके लिए बजट आता है। लेकिन जिले में बजट आने के बाद पैसा कहां चला जाता है, इसका लेखाजोखा किसी के पास नहीं है।