बलिया। बाल एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथमकांत की अदालत ने अनुसूचित जाति के 10 साल के बालक के साथ दुष्कर्म के मामले में बाल अपचारी (नाबालिग) को दोषी ठहराया है। उसे आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, एक व्यक्ति ने थाना बांसडीहरोड में 10 दिसंबर 2021 को तहरीर दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि गांव का ही एक लड़का उनके नाती को बहला-फुसलाकर 9 दिसंबर 2021 की शाम करीब चार बजे एक व्यक्ति की छत पर सुनसान स्थान पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बालक रोते हुए घर पहुंचा और परिजनों को आपबीती बताई। परिजनों ने देखा कि बालक के शरीर से रक्तस्राव हो रहा था। इसके बाद बांसडीह रोड थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य संकलित कर आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह प्रस्तुत किए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जिरह की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने बाल अपचारी को दोषी पाया। न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत 25 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड और अर्थदंड न देने पर एक वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं एससी-एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।