बलिया। 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाएगा। जिले में स्थित सेमी क्रिटिकल जोन क्षेत्र में अब काफी सुधार हुआ है और रसड़ा ब्लॉक जोन से बाहर हो चुका है। ग्रामीण इलाकों में जल संचयन को लेकर तालाबों का निर्माण जारी है। हालांकि जिले के अधिकांश इलाकों में गर्मी का मौसम आते ही जलस्तर खिसकना शुरू हो जाता है। गर्मी आ चुकी है और जल्द ही वह चरम पर होगी। ऐसे में हम भी प्रण करें कि हम सभी अपने स्तर से हर सूरत में पानी की बर्बादी रोकेंगे ताकि आगे समस्या इतनी विकराल न हो जाए कि हमें पछताना पड़ जाए।
जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। हम सब जानते हैं हमारे लिए जल कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सब बातें हम तब भूल जाते हैं जब अपनी टंकी के सामने मुंह धोते हुए पानी को बर्बाद करते रहते हैं और कई लीटर मूल्यवान पानी अपनी कीमती कार को नहलाने में बर्बाद कर देते हैं। इसी का नतीजा है कि आज पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है।
भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट के आधार पर जिले के रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र को सेमी क्रिटिकल जोन घोषित किया। वर्ष 2020 तक यह क्षेत्र सेमी क्रिटिकल जोन में रहा। हालांकि रसड़ा क्षेत्र में भू जलस्तर बचाने के लिए कई तरह की कवायद की गई और जल संरक्षण को लेकर खेत तालाब योजना का संचालन किया गया। इसके तहत वर्ष 17-18 में 22 व 18-19 में 12 तालाबों की खोदाई कराई गई। इसके अलावा वर्ष 2017-18 में शुरु हुई पं. दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत रसड़ा क्षेत्र में मेड़बंदी व वृक्षारोपण कार्य कराया गया ताकि भूमि संरक्षण के साथ जल संचयन भी हो सके। वर्ष 19-20 व 2020-21 में कुल 30 तालाब बनवाए गए। इलाके में जलस्तर में सुधार होने के कारण सेमी क्रिटिकल जोन से बाहर किया गया है।
कैच द रेन योजना के तहत 714 योजनाओं पर चल रहा कार्य
22 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री ने कैच द रेन अभियान का शुभारंभ किया था। उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि मनरेगा के हर पैसे को वर्षा जल संरक्षण पर खर्च किया जाना चाहिए। योजना के तहत बारिश के अधिक से अधिक पानी का संचयन करना है, ताकि गिरते भू जलस्तर को सुधारा जा सके। इस अभियान के तहत लोगों की सक्रिय भागीदारी के साथ जल संचयन गड्ढे, छत पर वर्षा जल संचय और चेक डैम बनाने के साथ ही नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों की सफाई, कूपों की सफाई आदि कार्य कराए जाने का प्रावधान है। अब तक योजना के तहत मनरेगा से कुल 15243 तरह की कार्ययोजना बनाई गई है। इसमें 714 योजनाओं पर कार्य भी शुरू हो चुका है।
14 सालों में बने 1637 तालाब व पोखरे
बलिया। वर्ष 2007-08 से वर्ष 2020-21 तक जिले में मनरेगा से कुल 1637 तालाबों का निर्माण कराया गया। इसके अलावा हर साल औसत 250 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाता रहा है लेकिन इन तालाबों पर धीरे-धीरे अतिक्रमण होता गया और राजस्व विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। खर्च का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है बीते चार सालों में ही तालाबों के जीर्णोद्धार पर करीब 19 करोड़ खर्च किए हैं। इसमें वर्ष 2015-16 में 320 तालाबों पर 4.12 करोड़, वर्ष 16-17 में 570 तालाबों पर 7.24 करोड़ और वर्ष 17-18 में 278 तालाबों पर 4.47 करोड़ एवं वर्ष 18-19 में 323 तालाबों पर तीन करोड़ 64 लाख 99 हजार, 19-20 में 203 तालाबों पर 3.9 करोड़ व 20-21 में 215 तालाबों के जीर्णोद्धार दो करोड़ की धनराशि खर्च की गई है। वर्ष 21-22 में 30 नए तालाब बनवाए गए हैं। वर्ष 2021-22 में 1.75 करोड़ से 117 तालाबों का जीर्णोद्धार हो चुका है। इसके अलावा 45 लाख से 30 पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार का कार्य अंतिम दौर में है।
217 स्थानों पर बनेंगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
शासन की ओर से जल संचयन को लेकर लगातार कवायद की जाती है। कैच द रेन योजना के तहत रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सरकारी भवनों पर लगाने का प्रावधान किया गया। हालांकि पूर्व में बने प्रस्ताव में बदलाव हो गया और केवल 217 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रस्ताव है। इसमें 54 स्थानों पर लग चुका है। जिले को शासन ने सेफ जोन में माना है लिहाजा पूर्व के चिह्नित स्थानों में बदलाव कर दिया है। नोडल अधिकारी जल संरक्षण व सहायक अभियंता लघु सिंचाई एसएस यादव की मानें तो बलिया को सेफ जोन माना गया है। रसड़ा क्षेत्र में पूर्व में जलस्तर की स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन यहां भी सुधार हुआ है।
भूगर्भ जलस्तर को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग विभागों की ओर से कार्य किए जा रहे हैं। जल ही जीवन है इसके प्रति आमलोगों को भी जागरुक होने की आवश्यता है। पुराने तालाब, पोखरी आदि पर अतिक्रमण आदि की शिकायत मिलने पर कार्रवाई कर अतिक्रमणमुक्त कराने का कार्य राजस्व विभाग की ओर से किया जाएगा।
- आरके सिंह, एडीएम, बलिया