आखिरकार गंगा ने रौद्र रूप धारण कर ही लिया। गंगा के साथ ही टोंस और मगई नदी ने भी इलाके में तबाही मचानी शुरू कर दी। खेतों में खड़ी एक हजार एकड़ फसल डूब चुकी है। किसान परेशान है कि दो साल सूखा तो इस साल बाढ़ ने तबाह करना शुरू कर दिया है।
कई गांवों के लोग पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। यदि जलस्तर बढने का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो दो दिन में पानी एनएच-31 को पार कर सकता है। शाहपुर बभनौली, चौबे छपरा और श्रीनगर गांव में एक दर्जन से अधिक मकान गिर गए।
शाहपुर बभनौली गांव में गंगा कटान से सर्वजीत, हरिकिसुन साहनी, आलोका देवी का मकान गंगा की गोद में समा गया। कटान के मुहाने पर आलोक यादव, राजू यादव, गंगाजल साहनी का घर कभी भी गंगा में विलीन हो सकता है।
दस मीटर पक्का ठोकर गंगा के तेज बहाव में बह गया। गंगा के रौद्र रूप को देखकर इच्छा चौबे का पुरा, कोट अंजोरपुर, शाहपुर बभनौली, बरकंटी, गंगहरा, कुल्हरिया, रइया खारी, श्रवणपुर, बेलची पार के लोग बाढ़ को देखते हुए पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं दियारे में फंसे कई हजार गाय, भैंस को निकालने के लिए पशु पालक बड़ी नाव की तलाश कर रहे हैं।
फेफना संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर हो गए हैं। टोंस और गंगा के रौद्र रूप के कारण आलम यह है कि क्षेत्र के कई स्कूल, अस्पताल, मंदिर, संपर्क मार्ग जलमग्र हो गए हैं। जिससे 50 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित हो रही है।
अंजोरपुर और हसनपुरा स्थित प्राथमिक विद्यालय, थम्हनपुरा स्थित जूनियर हाईस्कूल एवं रामजानकी मंदिर जहां पानी से घिर जाने के कारण बंद हो गए। वहीं पर स्थित पशु अस्पताल का कामकाज भी पूरी तरह से ठप हो गया है।
कपूरी से गंगहरा जाने वाला संपर्क मार्ग पर जहां तीन फीट पानी लग जाने के कारण यह मार्ग बंद हो गया है। थम्हनपुरा पुल से गांव में जाने वाला संपर्क मार्ग भी पूरी तरह से डूब जाने के कारण आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है।
चेरूइयां, मोहन की मठिया, गंगहरा, थम्हनपुरा, हसनपुरा, इंदरपुर, अंजोरपुर, कोट मझरिया आदि गांवों के लोगों को विविध प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गंगहरा-कपूरी मार्ग से होकर फेफना की तरफ विद्यालय जाने वाले छात्र-छात्राओं का विद्यालय जाना बंद हो गया है। कई विद्यालय के वाहन भी संपर्क मार्ग डूब जाने के कारण छात्र को लेने नहीं आ रहे।