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चार स्थानों पर नारियों को श्रृंगार कर नहीं जाना चाहिए

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दया छपरा। नारी वर्ग के चार कुंवारी कन्या, विधवा, जिस नारी का विवाह हो गया है और जिसका पति परदेश हो, संन्यासी व महात्मा को भी शृंगार नहीं करना चाहिए। उक्त बातें मानस प्रचार परिषद दया छपरा की ओर से आयोजित 66वां मानस सम्मेलन के तीसरे दिन सोमवार की देरशाम ब्रम्हपुर धाम से आए संत शिवजी उपाध्याय ने कही।
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संत श्री उपाध्याय ने बताया कि चार जगह शृंगार करके नहीं जाना चाहिए। श्मशान घाट पर, अपने से बड़े घर में, मंदिर में और यज्ञ समाज में भी शृंगार करके नहीं जाना चाहिए। त्रेता युग में अंजना ने शृंगार किया तो उनके पिता गौतम ऋषि ही श्राप दे डाला, शूर्पणखा भी शृंगार की, जिसके तहत भगवान राम से युद्ध हुआ।
दूसरे क्रम में बिहार राज्य धर्म संघ के अध्यक्ष व संत पंडित रमाशंकर शास्त्री ने कहा कि संत के बिना परमात्मा का दर्शन असंभव है। भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर जब भरत जी गए तो ऋषि भारद्वाज ने कहा कि भरत प्रभु श्रीराम भी आए हैं परंतु मुझे सबसे खुशी आपसे मिल कर हुई। अगर आप नहीं आते तो प्रभु का दर्शन मुझे नहीं हो पाता। बताया कि संत भरत के कारण ही प्रभु का दर्शन होता है।
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तीसरे क्रम में मथुरा वृंदावन के जीयर स्वामी के शिष्य हिमांशु स्वामी ने प्रभु श्रीराम जन्म प्रसंग में बताया कि प्रभु श्रीराम का अवतार है तो वहीं वीर हनुमान का अवतार है। यह दोनों ब्रह्म व संत एक ही साथ धरती पर पापियों के नाश के लिए अवतार लिए।
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