बेल्थरारोड। चकबंदी विभाग के अधिकारियों के उदासीन रवैए के चलते 18 साल बाद भी चैनपुर गुलौरा ग्राम की चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण न होने और बंदोबस्त नक्शा जारी न होने से गंवईं अमन-चैन को ग्रहण लग गया है। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
बताया जाता है कि वर्ष 2002 में चैनपुर गुलौरा ग्राम में चकबंदी प्रक्रिया शुरू की गई थी। सुस्त गति से चल रही चकबंदी प्रक्रिया के तहत 2017 में धारा 52 का प्रकाशन भी हो गया। इसके बाद भी चकबंदी प्रक्रिया से गांव के बाहर आने के बावजूद ग्राम के काश्तकारों को बंदोबस्त नक्शा उपलब्ध नहीं कराया गया। ग्रामीणों की मांग के बाद चकबंदी अधिकारियों ने आनन-फानन में बंदोबस्त नक्शा जारी कर दिया, लेकिन त्रुटिपूर्ण होने के चलते वर्ष 2018 में नक्शा निरस्त कर दिया गया। उसके दो वर्ष बाद भी संशोधित नक्शा ग्रामीणों को मुहैया नहीं कराया गया। तहसील में गांव का नक्शा न होने से चकरोड, नाली या अन्य विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। नक्शा जारी न होने से आए दिन खेतों की मेड़बंदी को लेकर काश्तकारों के बीच विवाद हो रहा है। साथ ही पूरा गांव झगड़ा और तनाव का अखाड़ा बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदोबस्त नक्शा शीघ्र मुहैया नहीं कराया गया तो असहज स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस बाबत बंदोबस्त अधिकारी धनराज यादव ने कहा कि वर्ष 2018 में बंदोबस्त नक्शा अपूर्ण होने के चलते उसे निरस्त कर दिया गया। नक्शा पूर्ण करने की कार्रवाई चल रही है। इसके लिए चकबंदी अधिकारी को लेखपाल और कानूनगो के साथ मौका मुआयना कर बंदोबस्त नक्शा पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। एक पखवाड़े के भीतर हर हाल में नक्शा उपलब्ध करा दिया जाएगा।