विकास खंड रसड़ा में कोटेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से करीब छह माह से राशन का वितरण नहीं किया गया है। ऐेसे में गरीब किसी तरह बाजार से महंगे दामों पर राशन खरीदने को विवश हैं। कोटे के राशन के लिए ग्रामीणों ने कई बार तहसील से लेकर जिले स्तर तक धरना-प्रदर्शन किया। लेकिन खाद्यान माफियाओं के आगे प्रशासन लाचार नजर आया।
रसड़ा विकास खंड के 75 गांव और नगरपालिका परिषद के 25 वार्डो में जब से पात्र गृहस्थी कार्ड सरकार द्वारा बनाना शुरू किया गया है। तब से अब तक कोटेदारों ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से अनाज का एक दाना भी वितरित नहीं किया गया। राशन कार्ड धारकों का आरोप है कि कोटेदार, सप्लाई इंस्पेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी की मदद से गरीबों का राशन कागज पर ही वितरित कर दिया जाता है। जबकि हकीकत में उनका अनाज कालाबाजार में बेच दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो रबी की पैदावार अच्छी नहीं हुई है। वहीं कोटेदार और अधिकारी राशन नहीं देकर घाव पर नमक छिड़कने का कार्य कर रहे है। पात्र गृहस्थी लागू हुए लगभग छह माह हो गए, लेकिन हम मजलूमों को आज तक राशन कार्ड नहीं मिला है।
पूछने पर अधिकारियों द्वारा कहा जाता है कि अब तक राशन कार्ड जारी ही नहीं हुआ। कार्डधारक पात्र गृहस्थी कार्ड के लिए तहसील स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई बार आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन हर बार उच्चाधिकारियों ने केवल आश्वासन की केवल घुट्टी पिलाई है।
पहाड़पुर निवासिनी राजमुनि देवी ने कहा कि जबसे पात्र गृहस्थी का कार्ड जारी हुआ है तबसे राशन का एक दाना भी कोटे से नहीं मिला है। हर बार अगले महीने का हवाला देकर टाल दिया जाता है।
वहीं राघोपुर निवासिनी संध्या ने कहा कि सरकार महिलाओं के नाम पर राशन कार्ड जारी कर योजना सफल होने का ढोंग कर रही है। केवल महिलाओं के साथ छलावा किया जा रहा है। छह माह से न अनाज ही मिला न है और कार्ड।
गुरगुजपुर निवासी शांति देवी का कहना है कि केंद्र की मोदी उज्जवला योजना से गैस तो दिलवा दिया। लेकिन राशन ही नहीं मिलेगा तो पकाएंगेे क्या? वहीं रसड़ा कस्बा के सोनईडीह निवासी बासमती देवी ने कहा कि हम गरीब साक्षर नहीं हैं। जिसका कोटेदार और अधिकारी फायदा उठा रहे है। राशन लेने जाने पर कहते है कि लिस्ट में नाम ही नहीं है।