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तीन दोषियों को पांच वर्ष का कारावास

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न्यायालय विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 7 ओमप्रकाश की अदालत ने उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के मामले में तीन दोषियों को पांच वर्ष कठोर कारावास और 25-25 हजार जुर्माना की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर में तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतना होगा।
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अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा अशोक सिंह यादव थानाध्यक्ष सुखपुरा द्वारा 24 अप्रैल 2011 को थाना सुखपुरा पर दिया था। जिसमें उल्लेख था कि पिंटू यादव, अनूप यादव, इसरार का एक संगठित गिरोह है, जिनका गैंग लीडर पिंटू यादव है। गिरोह के सभी सदस्य मिलकर संगठित अपराध का कार्य करते हैं तथा वह स्वयं एक गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर लोक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करके अपने गिरोह के सदस्यों के लिए अनुचित आर्थिक भौतिक एवं अन्य लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से अकेले या सामूहिक रूप से बल हिंसा आदि के द्वारा जन शांतिभंग कार्य करते हुए समाज विरोधी क्रियाकलापों में लिप्त रहते हैं। इससे समाज में इनका आतंक व्याप्त है इसके मामले में इनके विरुद्ध सुखपुरा थाना में 2011 में मुकदमा पंजीकृत हुआ था। इस मामले में विवेचक द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया जिस पर न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए उपरोक्त अभियुक्त पिंटू यादव पुत्र सूरज यादव, अनूप यादव पुत्र लक्ष्मी यादव, इसरार अहमद उर्फ मिंटू पुत्र सलीम अहमद शाह ग्राम बिलारी थाना सुखपुरा के खिलाफ न्यायालय द्वारा आरोप पत्र द्वारा आरोपित किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाहों को परीक्षित करने के उपरांत अभियोजन पक्ष की तरफ से अजय कुमार तिवारी विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट )व बचाव पक्ष की तरफ से कंचन पांडेय अधिवक्ता के बहस को सुनने के उपरांत अभियुक्तों के खिलाफ दोष साबित पाते हुए दोष सिद्ध किया गया। इसमें उपरोक्त अभियुक्तों को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा और 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
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