सात सालों से नगरा के खैरानिस्फी गांव के एमडीएम व पंचायत भवन निर्माण में गोलमाल की फ़ाइल कार्रवाई के लिए घूम रही है। हैरानी की बात है कि ऑनलाइन शिकायतों को भी अधिकारी एक दूसरे को भेजकर अपना पल्ला झाड़ रहे। हैं। इस गोलमाल की पुष्टि तत्कालीन बीएसए व बीडीओ ने जांच में करते हुए कार्रवाई के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को रिपोर्ट भेजी थी।
बतौर उदाहरण मुख्यमंत्री को 25 अप्रैल 2017 को भेजी गई शिकायत संख्या 40019317000540, 24 अगस्त 2017 को डीएम को भेजी गई शिकायत संख्या 40019317002829, मुख्यमंत्री को नौ दिसंबर को भेजी गई शिकायत संख्या 4019317006370 को देखा जा सकता है जिसे अधिकारियों ने निस्तारित कर दिया है जबकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बताया जाता है कि वर्ष 2010 में नगरा ब्लाक के सोनाड़ी गांव निवासी इंद्रजीत तिवारी ने अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर बताया कि खैरानिस्फी गांव में प्रधान व सचिव की मिलीभगत से एमडीएम के खाद्यान्न व कन्वर्जन मनी में धांधली की गई है।
तिवारी ने सितम्बर 2005 से सितम्बर 2010 के बीच प्रधान व सचिव के कार्यकाल के दौरान संचालित एमडीएम की जांच कर कार्रवाई की मांग की। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तत्कालीन बीएसए एमपी सिंह कुशवाहा ने मामले की जांच एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक से कराई। जांच में सामने आया कि 55.28 कुंतल एमडीएम के खाद्यान्न का गोलमाल किया गया है और बतौर कन्वर्जन मनी 83 हजार 255 रुपए का गबन किया गया है। बीएसए ने प्रधान व सचिव से खाद्यान्न व गबन की धनराशि की रिकवरी करने व विधिक कार्रवाई के लिए 23 अक्टूबर 2010 को डीपीआरओ को जांच रिपोर्ट भेजी। उधर, डीएम के रिपोर्ट पर नगरा ब्लाक के तत्कालीन बीडीओ ने जांच में पाया कि पंचायत भवन निर्माण के लिए 2.84 लाख का आहरण किया गया है लेकिन इसका उपयोग पूरी तरह नहीं किया गया है। तत्कालीन बीडीओ ने इस धनराशि की रिकवरी भी प्रधान व सचिव करने की संस्तुति की। आलम यह है कि शिकायतकर्ता बीते सात सालों में सैकड़ों बार इस मामले से आला अफसरों को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग कर चुका है। सोनाड़ी गांव के इंद्रजीत तिवारी ने चार दिसंबर को प्रदेश के उप सचिव दिलीप कुमार श्रीवास्तव को शिकायत संख्या 16193170489737 भेजा।
इसके निस्तारण के क्रम में 13 दिसंबर को डीपीआरओ ने डीएम को पत्र भेज कर बताया कि रसड़ा ब्लाक के सोनाड़ी गांव निवासी इंद्रजीत तिवारी की शिकायत है। जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई के बजाए अधिकारी अजीबो-गरीब तथ्यों के साथ शिकायतों को निस्तारित कर दे रहे हैं। ग्राम प्रधान सोनाड़ी, विकास खंड सीयर के खिलाफ मिली शिकायती पत्र के निस्तारण के लिए अपर जिला विकास अधिकारी समाज कल्याण को जांच अधिकारी नामित करते पत्र प्रेषित किया गया है। एक अन्य शिकायती पत्र को भी जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास को जांच कर आख्या के लिए पत्र भेजा गया है। लेकिन अभी तक जांच अधिकारी की ओर से रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया गया है। हैरानी की बात है कि इस पत्र में डीपीआरओ ने शिकायतकर्ता का पता, प्रधान के गांव का नाम व ब्लाक का नाम ही गलत भेज दिया और शिकायत निस्तारित भी कर दिया गया।