गांव में घुसा बाढ़ का पानी
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बलिया में गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर की ओर से बढ़ने के साथ टोंस और मगई नदी भी उफनाने लगी हैं। टोंस का जलस्तर भी खतरा बिंदु को पार कर गया है। कटान से जहां किसानों की उपजाऊ भूमि नदी की धारा में समाने लगी है। वहीं, नदियों का पानी किसानों के खेतों में घुसने लगा है। किसान जहां अपना सामान समेटने लगे हैं। मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया गया है।
गंगा के पानी से शाहपुर, बभनौली और इच्छा चौबे का पुरा गांव के पास उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। मंगई नदी मिल्की गांव में कटान कर रही है। तीनों नदियों का पानी खेतों में घुसने लगा है। तटवर्ती इलाकों के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। शाहपुर, बभनौली गांव के ग्रामीणों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। गंगा का पानी उमरपुर दियारे में पहुंच गया है।
उमरपुर दियारे में हजारों की संख्या में मवेशी खुले में रहते हैं। बाढ़ के पानी ने इनके सामने भी मुसीबत खड़ी कर दी है। पशुपालक अपने मवेशियों को नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं। गाय, भैंस, बछड़े, घोड़े, भेड़, बकरियों को नाव के सहारे इस पार लाया जा रहा है। यदि गंगा का जलस्तर एक मीटर और बढ़ा तो बड़े पैमाने पर तबाही होना तय है।
खरीफ एवं सब्जी की खेती में करोड़ों का नुक़सान हो सकता है। टोंस नदी का पानी चांद नाले को पार कर खेतों में घुसने लगा है। गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाएंगे। शनिवार को सपा नेता बंशीधर यादव ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। गंगा के कटान को देख दियारे से मवेशियों को लाने के लिए स्टीमर की मांग की।
सरयू नदी के जलस्तर में लगातार कमी हो रही है। वहीं, नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे बह रहा है। जलस्तर लाल निशान से नीचे चले जाने से बाढ़ की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इससे तटवर्ती सैकड़ों ग्रामों के हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार शाम जलस्तर 63.910 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 64.010 है। लाल निशान से 0.100 मीटर नीचे बहने वाली नदी के तेवर नरम पड़ गए हैं। अगले 24 घंटे में कमी का सिलसिला जारी रहने का पूर्वानुमान किया गया है। कुछ तटवर्ती क्षेत्रों में कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि कट-कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है।