पिछले दो वर्ष से सूखे से परेशान किसानों की कमर इस बार की बाढ़ ने तोड़ दी है। बाढ़ से फसलें जलमग्न होकर तहस-नहस हो गईं। गृहस्थी बेपटरी हो गई है। अगली खेती के सवाल ने किसानों की नींद उड़ा दी है। किसान साहूकारों से कर्ज लेने व बीज दूकानदारों से उधार के बीज की मांग करने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में साहूकारी सिर उठाने को तैयार हैं। उधर, कई किसानों ने अपने बच्चों की पहले से तय शादी या तो टाल दी है या फिर अगले फसल के बाद उनके हाथ पीले करने का मन बनाया है। इस साल जिले के करीब 225 गांव प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ की तबाही के बाद अब बाद किसानों को रबी की खेती के लिए खेतों की जुताई व बुआई करनी है लेकिन पैसे नहीं है कि किसान खेती कर सके। आगे की खेती करने के लिए किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। दो साल सूखा फिर इस साल बाढ़ ने किसानों को कर्ज के बोझ तले दबा दिया है। किसान खेती को लेकर सहमे हुए हैं। वहीं पशुपालक बाढ़ के दिनों में अपने रिश्तेदारों के यहां मवेशी पहुंचा दिए थे, वे अब मवेशियों को अपने-अपने घर लाना शुरू कर दिए हैं। उन्हें अभी भी चारे के गंभीर संकट से जूझना पड़ रहा है।