नगरा। बाहर से आने वाले मजदूरों को क्वॉरंटीन किया गया। उन्हें सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया गया। मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर हुई तो अधिकारियों ने प्रधान के माध्यम से सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कह कर निस्तारण करा दिया। अब दुबारा शिकायत पर बीडीओ का कहना है कि उन्हें होम क्वॉरंटीन किया गया था। इसके बाद भी वे खुद स्कूल पर रह रहे थे। इसलिए सुविधाएं नहीं मिलीं। अब लेखपाल के माध्यम से एक-एक हजार रुपए उपलब्ध कराया जाएगा। मामला नगरा विकासखंड के इनामीपुर गांव का है। शिकायत गांव के ही शिवजी सोनी ने मुख्यमंत्री से की है।
इनामीपुर निवासी शिवजी सोनी ने 21 मई को मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत की कि इनामीपुर गांव में 8 से दस प्रवासी बाहर से आए थे। उन्हे गांव के प्राथमिक विद्यालय पर क्वारंटीन किया गया था। क्वारंटीन के दौरान प्रवासियों को जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद बीडीओ नगरा, ग्राम प्रधान, सचिव द्वारा खान पान, साबुन, पंखा, मास्क, सेनेटाइजर आदि मुहैया नहीं कराया गया। एसडीएम रसड़ा व खंड विकास अधिकारी नगस्त्रत्त्रा को कई बार मोबाइल से सूचना दी गई, लेकिन कोई भी अधिकारी या कर्मचारी वहा प्रवासियों का हाल चाल लेने भी नहीं पहुंचा। मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत करने पर सम्बन्धित अधिकारियो द्वारा फर्जी रिपोर्ट लगा दी गई कि ग्राम प्रधान द्वारा सारी व्यवस्था कर दी गई है। जबकि किसी भी प्रवासी को कोई व्यवस्था नहीं मिली। 14 दिन बीतने के बाद सभी प्रवासी अपने घर चले गए। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की मांग की है। ग्राम प्रधान राजेंद्र राम ने बताया की स्कूल पर रहने वाले सभी लोग अपने घर का बना खाना खा रहे थे। यदि धन उपलब्ध हुआ तो खाने का पैसा दे दिया जाएगा। बीडीओ रामाशीष ने बताया कि जिले से होम क्वारंटीन का आदेश था, लेकिन वे खुद स्कूल पर रहते थे। अब लेखपाल के माध्यम से एक-एक हजार उनको दिया जाएगा।