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चुनावी जंग में घरों व दुकानों की जगह अब रंगी जा रही फेसबुक की दीवार

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बलिया। चुनाव आयोग की सख्ती और पाबंदियों के चलते इस बार बाहरी शोरगुल थमा है। लेकिन बदले हालात में फेसबुक के वॉल रंगे हुए हैं। कोरोना की वजह से इस विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया प्रचार का मुख्य हथियार बना है। ऐसे में पार्टियों ने इंटरनेट मीडिया पर प्रचार की जिम्मेदारी तकनीकी रूप से दक्ष कार्यकर्ताओं को सौंपी है।
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एक दशक पहले तक लोकतंत्र के महापर्व की गूंज हर ओर सुनाई देती थी। लाउडस्पीकर का शोर और रंगी दीवारें आम बात थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चुनावी ढंग बदला है। लेकिन इस बार तो कोरोना की वजह से माहौल और भी बदला हुआ है। जनसभा और रैलियों पर रोक है। ऐसे में दलों के नेता सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। नेताओं ने फेसबुक व ट्वीटर जैसे इंटरनेट मीडिया को अपना हथियार बनाया है। इनमें सबसे ज्यादा फेसबुक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही वजह है कि फेसबुक खोलते ही नेताओं की फोटो, वीडियो व अपील ही नजर आ रही है।
सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों ने तकनीकी रूप से दक्ष अपने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी है। पार्टी का आईटी सेल दिनभर अपने प्रत्याशी और पार्टी के पक्ष में प्रचार-प्रसार कर रहा है। कुछ पार्टियों ने बूथ स्तर पर व्हाट्सअप ग्रुप बना लिए हैं तो वहीं कुछ प्रत्याशियों को रिकॉर्डिंग कॉल द्वारा अपने पक्ष में वोटिंग करने आम उपभोक्ताओं के नंबर पर पहुंच रही है।
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