जनपद में दर्जनाें ऐसे धर्मस्थल हैं जो सार्वजनिक स्थान , हाईवे या फिर गलियों में अवैध रूप से काबिज हैं। जिसके चलते यातायात बाधित होती है। लोगों की दुश्वारियां बढ़ती हंै। सार्वजनिक स्थानों पर धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने का उच्च न्यायालय में आदेश जारी किया है, इससे इन धार्मिक स्थलों के संचालकों में हड़कंप है।
नगर से लगायत कस्बों में दर्जनो धर्मस्थल सार्वजनिक स्थानो पर काबिज हैं। कई धर्मस्थल मुख्य मार्गों के पिच पर ही बना दिए गए हैं। यही नहीं नेशनल हाईवे -31 पर भी धर्मस्थल अतिक्रमण किए हुए हैं। नगर के चित्तूपांडेय चौराहा, मालगोदाम रोड से शनिश्चरी मंदिर जाने वाले मार्ग, बलिया-सिकंदरपुर मार्ग, रोडवेज बस स्टाप के पास आदि जगहों की सरकारी जमीन पर धर्मस्थल काबिज हैं।
नेशनल हाईवे-31 पर कोटवाबाजार के पास भी धर्मस्थल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया है। यही नहीं कस्बों तक में सार्वजनिक स्थानों पर धर्मस्थलों बनाए गए हैं। इससे लोगों को असुविधा व यातायात भी प्रभावित होता है।
नगर में सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्र मण कर बनाये गये धर्मस्थलों से यातायात में काफी परेशानी होती है। धर्मस्थल होने के कारण वहां सड़क का चौड़ीकरण करने में प्रशासन के सामने समस्याएं उत्पन्न होती है। धर्मस्थल के नाम पर प्रशासन भी इस पचड़े में पड़ना नहीं चाहता है। सार्वजनिक जमीन पर धर्मस्थलों के निर्माण को उच्च न्यायालय ने गम्भीरता से लिया है। ऐसे अतिक्रमण किए धार्मिक स्थलों को हटाने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया गया है।
उच्चन्यायाल के आदेश के बाद शासन व प्रशासन चौकस हो गया है। शासन का निर्देश मिलते ही ऐसे धार्मिक स्थलों को हटाने की कारवाई शुरू कर दी जायेगी। उच्चन्यायालय के आदेश के बाद धार्मिक स्थलों के संचालन में लगे लोगों में हड़कम्प मच गया है। धार्मिक स्थलों पर बनी कमेटियां भी चिंतित हैं। सार्वजनिक जमीन से धार्मिक स्थलों को न हटाना पड़े, इसके लिए जुगत लगाई जा रही है।