ट्रेजरी का स्ट्रांग रुम खुलवाने के लिए जाते जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम एवं वरिष्ठ कोषाधिकारी श्रीप्रकाश सिंह।
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जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग में सालों पहले हुए 12 करोड़ के जीपीएफ घोटाले की जांच के लिए हाईपावर कमेटी गुरुवार को पहुंची। टीम शिक्षकों की नियुक्तियों से संबंधित पत्रावली को खंगालने के लिए कोषागार गई जहां डीएम सुरेन्द्र विक्रम की मौजूदगी में डबल लॉक खोला गया। पूरे दिन टीम पत्रावलियों को खंगालती रही। सूत्रों की मानें तो टीम 279 शिक्षकों की सूची लेकर पहुंची है। हाईकोर्ट ने सरकार को चेताया है कि जीपीएफ घोटोले के दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो सीबीआई जांच कराई जा सकती है। कोर्ट ने आठ अगस्त को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है लिहाजा हाईपावर कमेटी इसके पहले जांच को अंतिम रुप देने का काम करेगी।
वर्ष 1994-95 व वर्ष 2003 से 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से अनियमित शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया गया। हालंाकि मामले खुलासा वर्ष 2002 में हुई और विजिलेंस टीम ने 379 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया और शासन को जांच रिपोर्ट भी सौंपी। लेकिन सत्ता तक पहुंच रखने वाले अधिकारियों के जुगाड़ से सालों तक मामला दबा रहा। इतना ही नहीं इसके बाद भी वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया जाता रहा।
बीते मार्च महीने में वित्त विभाग के सहायक लेखाधिकारी रवि प्रकाश द्विवेदी तथा लेखाधिकारी शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में दो टीमें जिले में आई थी और जांच-पड़ताल की थी। म की मांग के बाजवूद जीपीएफ से संबंधित कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। चार दिन पहले पत्रावलियों के कस्टोडियन के आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ के निर्देश पर डीआईओएस ने सात लेखा सहायकों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है। जबकि विजिलेंस ने जांच में सात डीआईओएस तथा इस दौरान कार्यरत लेखाकार को घोटाले के लिए दोषी माना है।
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई चल रही है। हाईपावर कमेटी में माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक रमेश कुमार, संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ अनारपति वर्मा, डीआईओएस बलिया अमरनाथ राय तथा मऊ के डीआईओएस हैं।