उत्तरी दियरांचल के करीब 50 हजार लोगों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए रामबालक बाबा सेतु का निर्माण जरूरी है। 14 करोड़ की लागत से बनने वाले पुल का निर्माण काफी पुल धीमी गति से चल रहा है। दो महीने में सेतु निगम बस तीन पाया तैयार करवा पाई है। इससे इलाके के लोगों में नाराजगी है। अगर पुल का निर्माण वक्त से नहीं हुआ तो बरसात के समय दियरांचलवासियों को नाव का सहारा लेना मजबूरी हो जाएगा। लोगों ने कहा कि पहले भी दो बार पुल का निर्माण हुआ है, लेकिन वह एक साल के भीतर ही घाघरा में समाहित हो चुकी हैं।
वर्ष 2001 में 21 लाख रुपये की लागत से इस सेतु का निर्माण हुआ। इस पुल को बने एक साल भी नहीं हुआ कि यह घाघरा नदी के बाढ़ में समाहित हो गया। पुन: वर्ष 2011 में करीब चार करोड़ की लागत से सेतु निगम ने पुल का निर्माण कराया, लेकिन एक साल के अंतराल में घाघरा नदी के वेग को नहीं सह पाया और पुल का एक पाया बैठ गया। इससे सेतु निगम ने पुल प्रतिबंध लगाते हुए यह रिपोर्ट दी की यह अब लोगों के चलने लायक नहीं है। इसके बाद दर्जनों गांव की 50 हजार से अधिक की आबादी पुल निर्माण के लिए धरना-प्रदर्शन की और पुलिस की मांग की।
इसके बाद शासन स्तर से 200 मीटर लंबी पुल करीब 14 करोड़ की लागत से बन रहा है। पुल निर्माण के समय किसानों ने अपनी जमीन न देने की बता कही थी और पुल बनने से रोक दिया था। लेकिन पीडब्लूडी ने करीब 30 लाख की लागत से किसानों की जमीन रजिस्ट्री कराकर पुल का निर्माण सेतु निगम से शुरू कराया। अब पुल का निर्माण चल रहा है। लेकिन यह गति इतनी धीमी है कि दो माह में केवल तीन पाया ही किसी तरह बन पाया है। दियरांचलवासियों का कहना है कि सपा को हमने पुल निर्माण के नाम पर वोट दिया था। पुल निर्माण जरूर हो रहा है, लेकिन चार साल बीतने के बाद। यही हाल रहा तो इस बात भी बरसात के दिन में नाव का सहारा लेना पड़ेगा।