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जन औषधि केंद्र की दवा नहीं लिख रहे है चिकित्सक

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बलिया। जिस उद्देश्य से जिला अस्पताल और महिला अस्पताल समेत जनपद में कुल छह स्थानों पर जन औषधि केंद्र खोला गया था। उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कारण कि चिकित्सक अस्पताल जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाएं नहीं लिख रहे हैं। जिसके कारण कुल छह दुकानों में से सिकंदरपुर, सहतवार, तिखमपुर व रसड़ा में जन औषधि केंद्र बंद हो गए है। वर्तमान में जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में संचालित है। जबकि जन औषधि केंद्र पर वर्तमान में 450 दवा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। अगर चिकित्सकों की इसी प्रकार उदासीनता बनी रही तो वह दिन दूर नहीं, जब यह सभी जन औषधि केंद्र बंद हो जाएंगे और प्रधानमंत्री का सपना चूर-चूर हो जाएगा। मरीजों व दुकान संचालक का कहना है कि चिकित्सकों द्वारा दवाएं बाहर से लिखी जाती हैं। अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त की दवाएं चिकित्सक लिखने से परहेज करते हैं।
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मालूम हो कि जन औषधि केंद्र पर एमाक्सी क्लेव, जीरोडाल-पी, पेंटाप डीएसआर, जीरोडाल-एसपी, मल्टी विटामिन, सलबैक्टम, टीजोवैक्टम, सीफोराक्सिन, बुखार, ब्लड प्रेशर, शुगर समेत कई बीमारियों की दवाइयां जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध है। वहीं महिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर भी 450 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध है। ये दवाएं बाजार की ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती हैं। बता दे कि कैल्शियम की दवा जन औषधि केंद्र पर मात्र 16 रुपये मिल रही है, जबकि बाहर ब्रांडेड कंपनियां इसे 100 से 120 रुपये में बेच रही हैं। इसी प्रकार एमाक्सीक्लेव मात्र 51 रुपये मिल रही है, जबकि ब्रांडेड कंपनियां इसे 120 पत्ता रुपये में बेच रही हैं। जीरोडाल-पी नौ रुपए पत्ता मिलता है। जबकि बाहर 55 रुपए पत्ता मिलता है। वही पेंटाप डीएसआर 20 रुपया तथा बाहर में 119 रुपये में मिल रही है। जीरोडाल एसपी 17 रुपया तथा बाहर में 110 रुपए
में मिलता है। इसी प्रकार मल्टी विटामिन 30 रुपये तथा बाहर में 120 रुपये में मिलता है। अगर डॉक्टर जेनेरिक दवा लिखते तो मरीज की जेब पर 40 से 50 प्रतिशत बोझ कम हो जाता है और दुकान संचालकों की भी रोजी रोटी चलती रहती। लेकिन डाक्टर ये दवा नहीं लिख रहे है।
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जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक सुशील सिंह ने बताया कि डाक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली करीब 450 प्रकार की दवाइयां वर्तमान में उपलब्ध है। लेकिन अस्पताल के चिकित्सक जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाइयों को नहीं लिख रहे है। वे बाहर की दवाइयां लिखते है। बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जन औषधि केंद्र इसलिए खोला गया गया कि जो दवाइयां जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं होगी, वह कम दामों पर जन औषधि केंद्र पर मिल जाएगी। लेकिन यहां ठीक उल्टा हो रहा है। लेकिन लोग स्वयं जागरूक होकर जन औषधि केंद्र पर आ रहे है। बताया कि अगर कोई मरीज काउंटर से दवा लेकर चिकित्सक को दिखाने जाता है तो चिकित्सक दवाओं को वापस करा देते है। इस बाबत प्रभारी सीएमएस डा. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सभी चिकित्सकों को जन औषधि केंद्र की दवा लिखने के लिए निर्देशित किया जाएगा। बावजूद अगर नहीं लिखते है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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